बुधवार, 29 जुलाई 2026

लखनऊ : ध्वस्तीकरण और जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने आवास विकास परिषद मे धान रोपाई कर जताया विरोध।।|Lucknow: Farmers protested against demolition and land acquisition by planting paddy at the Housing Development Council office in Vrindavan Yojana.||

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लखनऊ : 
ध्वस्तीकरण और जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने आवास विकास परिषद में धान रोपाई कर जताया विरोध।।
●पुराने कानून से अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने कहा—'हमारी जमीन, हमारा अधिकार,बड़े आन्दोलन का एलान'।
दो टूक  : राजधानी लखनऊ के वृन्दावन योजना सेक्टर 9 वृन्दावन योजना मे स्थित आवास विकास परिषद की आफिस में बुधवार को गोसाईगंज ब्लॉक क्षेत्र के युवा किसानों ने भूमि अधिग्रहण एवं ध्वस्तीकरण के विरोध मे जमकर प्रदर्शन करते हुए धान रोपाई कर विरोध जताया है सहायक आयुक्त के आश्वासन पर विरोध प्रदर्शन का गतिरोध खत्म हुआ।इस दौरान परिसर मे भारी पुलिस बल तैनात रहा। यह विरोध प्रदर्शन कृषक एकता समिति के नेतृत्व में किया गया जिसमे युवा किसानों का जोश था।
विस्तार :
उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की प्रस्तावित भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना संख्या-1 एवं योजना संख्या-3 को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। प्रभावित किसानों ने कृषक एकता समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता क्षितिज सिंह के नेतृत्व मे बुधवार को वृन्दावन योजना सेक्टर 9 आवास एवं विकास परिषद कार्यालय में विरोध प्रदर्शन करते हुए आयुक्त को ज्ञापन भेजकर 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत की जा रही अधिग्रहण प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसे तत्काल निरस्त करने, भूमि की खरीद-फरोख्त (रजिस्ट्री) पर लगी रोक हटाने तथा किसानों की आपत्तियों की सुनवाई उनके गांवों में ही कराने की मांग की है।
क्षितिज सिंह का कहना है कि वर्ष 2013 में नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बावजूद परिषद पुराने 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत कार्रवाई कर रही है, जो किसानों के हितों के विपरीत है। उनका आरोप है कि पुराने कानून का सहारा लेकर उनकी भूमि जबरन अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे न तो अपनी भूमि अधिग्रहण के लिए देंगे और न ही किसी प्रकार की लैंड पूलिंग योजना में शामिल होंगे।
◆दो वर्षों से रजिस्ट्री पर रोक, किसान आर्थिक संकट में।।
ज्ञापन में किसानों ने बताया कि भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना संख्या-1 का प्रकाशन हुए लगभग दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया है। इसके बावजूद उनकी जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक जारी है। किसानों का कहना है कि इस प्रतिबंध के कारण वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। कई परिवार बेटियों और पुत्रों के विवाह के लिए अपनी जमीन का छोटा हिस्सा भी नहीं बेच पा रहे हैं, जबकि कई किसान गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और इलाज के लिए भी जमीन बेचने में असमर्थ हैं। किसानों ने मांग की कि तत्काल प्रभाव से रजिस्ट्री पर लगी रोक हटाई जाए।
●गांवों में हो आपत्तियों की सुनवाई।।
किसानों ने यह भी मांग उठाई कि उनकी आपत्तियों की सुनवाई परिषद कार्यालय के बजाय संबंधित गांवों में सार्वजनिक रूप से कराई जाए। उनका कहना है कि अधिकांश भूमि आज भी परिवार के बुजुर्गों के नाम दर्ज है, जिन्हें कार्यालय बुलाना व्यावहारिक नहीं है। किसानों ने आरोप लगाया कि कार्यालय में सुनवाई के दौरान उन पर लैंड पूलिंग योजना से जुड़े शपथ पत्रों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जाता है। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जिन किसानों ने किसी कारणवश पहले आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, उन्हें भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
◆ध्वस्तीकरण नोटिस वापस लेने की मांग।।।
ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया कि आवास एवं विकास परिषद गांवों में बने मकानों पर लगातार ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा कर मकान गिराने की चेतावनी दे रही है। किसानों ने इसे तानाशाहीपूर्ण रवैया बताते हुए सभी ध्वस्तीकरण नोटिस तत्काल वापस लेने और भविष्य में ऐसी कार्रवाई न करने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों के मूल अधिकारों का सम्मान किया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए।
●बड़े आंदोलन की चेतावनी।।।
किसान नेता क्षितिज सिंह ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि गृहस्थान योजना के भाग-1 के सठवारा, भटवारा, मगहुआ सहित अन्य गांवों तथा भाग-3 के देहरामऊ, पहासा, शिवलर समेत कई गांवों के किसान इस अधिग्रहण से प्रभावित हैं और सभी किसान एकजुट होकर 1894 के कानून के तहत प्रस्तावित अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। किसानों ने मांग की कि यदि भूमि अधिग्रहण किया जाना है तो वह केवल 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाए।