नई दिल्ली//पेपर लीक विवाद पर बड़ी कार्रवाई: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद, छात्र आंदोलन का बड़ा असर!!
दो टूक//नई दिल्ली। देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। NEET-UG परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच आया यह फैसला केंद्र सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। स्वयं धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजने की जानकारी साझा की।
अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें बेहद व्यथित किया है। उन्होंने लिखा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और विश्वास का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि भारत की युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी प्रकार के भ्रम या भटकाव का शिकार नहीं होने दिया जाएगा।
NEET पेपर लीक के बाद भड़का देशव्यापी आंदोलनमई 2026 में आयोजित NEET-UG परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद देशभर में लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में छात्रों और युवाओं ने लगातार प्रदर्शन शुरू कर दिए। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई थी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग रहा है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन जारी रखा।
सरकार ने जांच कराई, सुधारों का भी किया ऐलान
पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इसके साथ ही परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया। सरकार ने यह भी घोषणा की कि अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
अपने इस्तीफे के पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित करना था। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई और 16 जुलाई को घोषित परिणामों में गरीब एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की।
'पहले दिन से जिम्मेदारी स्वीकार की'
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो और किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न होने पाए।
उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में जिस तरह का माहौल बना, उससे राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ उठा सकती थीं और छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में उलझ सकता था। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।
विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रहा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने कहा कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में हुई गड़बड़ी के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है। विपक्ष का कहना था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई और व्यवस्था में व्यापक सुधार बेहद जरूरी है।
तीसरे दौर की वार्ता से पहले आया इस्तीफा, बदला पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच शनिवार को तीसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित थी। हालांकि बैठक शुरू होने से पहले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। इस घटनाक्रम ने पूरे आंदोलन को नया मोड़ दे दिया और राजनीतिक हलकों में इसके दूरगामी प्रभावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
जंतर-मंतर पर CJP समर्थकों में खुशी की लहर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने इसे 36 दिनों से जारी आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए नारेबाजी की और एक-दूसरे को बधाई दी। समर्थकों का कहना था कि छात्रों और युवाओं की आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंची और लगातार बने जनदबाव के कारण यह फैसला लेना पड़ा। उनका कहना था कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे की बात नहीं, बल्कि देशभर के लाखों विद्यार्थियों के संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन की महत्वपूर्ण सफलता है। अब उनकी मांग है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करे और पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।
अभिजीत दीपके बोले—'सरकार झुक गई, क्रांति हो गई'
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने इस्तीफे को छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताया। जंतर-मंतर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "झुकती है दुनिया, बस झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने कहा कि पिछले 36 दिनों से लोग लगातार पूछ रहे थे कि क्या सरकार झुकेगी, लेकिन आखिरकार जनआंदोलन के आगे सरकार को फैसला लेना पड़ा।
उन्होंने कहा, "पहले कहा जाता था कि इस सरकार में कोई इस्तीफा नहीं देता, लेकिन आज सरकार झुक गई और क्रांति हो गई।" उनके इस बयान के दौरान प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और खुशी का इजहार किया।
अमेरिका से लौटने का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में अभिजीत दीपके ने कहा कि जब वह अमेरिका से भारत लौट रहे थे, तब कई लोग आंदोलन की सफलता पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्हें विश्वास था कि छात्रों की आवाज जरूर सुनी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लाखों छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के शांतिपूर्ण संघर्ष का परिणाम है।
अब सरकार के अगले कदम पर देश की नजर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार किसे सौंपा जाएगा और केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक संस्थागत सुधार भी जरूरी होंगे।
देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार परीक्षा सुधार, पेपर लीक पर स्थायी रोक और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर आगे क्या फैसला करती है।
