बाढ़ से पहले अलर्ट मोड में गौतमबुद्धनगर प्रशासन, यमुना-हिंडन किनारे के इलाकों पर विशेष नजर!!
14 जुलाई तक सभी विभागों से तैयारियों की रिपोर्ट तलब, एडीएम ने राहत-बचाव से लेकर ड्रेनेज, बिजली और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की
दो टूक//गौतमबुद्धनगर, 10 जुलाई। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए गौतमबुद्धनगर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को जूम ऐप के माध्यम से जिले की बाढ़ तैयारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यमुना और हिंडन नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करते हुए सभी विभागों को समय रहते अपनी तैयारियां पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए।
बैठक में सिंचाई विभाग ने बताया कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जेवर और दादरी तहसील के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। वहीं हिंडन नदी में जलस्तर बढ़ने और यमुना में अधिक पानी आने पर बैक वाटरिंग के कारण आसपास के निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी विभागों को समन्वित कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए।
अपर जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित बाढ़ चौकियों, बाढ़ शरणस्थलों और प्रमुख नालों का स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और किसी भी कमी को तत्काल दूर करने के लिए कहा गया।
बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों को नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम की जांच और आवश्यक सुधार कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा लो-लाइन एरिया और रिवर बेल्ट में संभावित अवैध निर्माणों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया।
प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों और उनके पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पहले से ही सुरक्षित स्थलों का चिन्हीकरण करने और शिफ्टिंग प्लान तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इसकी पूरी जानकारी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि पूर्व वर्षों की बाढ़ से मिले अनुभवों के आधार पर रैपिड रिस्पांस टीम, मेडिकल टीम, एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में स्थित गौशालाओं का चिन्हीकरण करने, पर्याप्त भूसे की व्यवस्था सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर पशुओं के लिए वैकल्पिक ठहराव की योजना तैयार रखने के निर्देश दिए गए।
विद्युत विभाग को टूटे हुए बिजली के पोल, झूलते तार और अन्य संभावित खतरों की तत्काल जांच कर उन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। साथ ही बाढ़ चौकियों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर कंट्रोल रूम संचालित करेंगे और उनके संपर्क नंबर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित समन्वय स्थापित किया जा सके।
अपर जिलाधिकारी अजीत कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी तैयारियां पूरी करें और की गई कार्रवाई की सत्यापित रिपोर्ट फोटोग्राफ सहित 14 जुलाई 2026 तक जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
बैठक में समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, पुलिस विभाग, प्राधिकरणों के अधिकारी, जिला आपदा विशेषज्ञ ओमकार चतुर्वेदी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।।
