शनिवार, 4 जुलाई 2026

'अमिट अटल' में जीवंत हुई अटल जी की विरासत, दत्तात्रेय होसबाले और डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने साझा किए अनमोल संस्मरण!!

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'अमिट अटल' में जीवंत हुई अटल जी की विरासत, दत्तात्रेय होसबाले और डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने साझा किए अनमोल संस्मरण!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नई दिल्ली, 3 जुलाई। राष्ट्रभक्ति और वैचारिक पत्रकारिता के लिए प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्र पाञ्चजन्य द्वारा भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के विराट व्यक्तित्व, राष्ट्रवादी चिंतन और सार्वजनिक जीवन पर आधारित विशेष वृत्तचित्र 'अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल' का नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार में भव्य प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य अतिथि तथा प्रख्यात विचारक एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित बड़ी संख्या में लेखक, पत्रकार, बुद्धिजीवी और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।

वृत्तचित्र के प्रदर्शन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी के स्वयंसेवक, प्रचारक, प्रखर पत्रकार, ओजस्वी कवि, दूरदर्शी संपादक और देश के प्रधानमंत्री बनने तक के प्रेरणादायी जीवन सफर को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। वृत्तचित्र ने न केवल अटल जी के व्यक्तित्व के अनेक अनछुए पहलुओं को उजागर किया, बल्कि उनके राष्ट्र समर्पित जीवन, वैचारिक दृढ़ता और सार्वजनिक मूल्यों को भी जीवंत रूप में दर्शकों के सामने रखा।

मुख्य अतिथि दत्तात्रेय होसबाले ने पाञ्चजन्य की पूरी टीम को इस उत्कृष्ट वृत्तचित्र के निर्माण के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री अटल जी के जीवन और विचारों का एक सजीव दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि इसे देखकर अटल जी से जुड़े अनेक ऐतिहासिक प्रसंग और संस्मरण फिर से आंखों के सामने ताजा हो उठे। उन्होंने बताया कि मात्र 27 वर्ष की आयु में श्रद्धेय भाऊराव देवरस की प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन में अटल बिहारी वाजपेयी को पाञ्चजन्य का प्रथम संपादक बनाया गया था।

उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी लेखनी, ओजस्वी वक्तृत्व और कालजयी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रवादी पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान की। उनकी प्रसिद्ध कविता "हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय" पहली बार पाञ्चजन्य में ही प्रकाशित हुई थी। श्री होसबाले ने बताया कि पाञ्चजन्य के पहले संपादकीय का शीर्षक "जम्मू-कश्मीर से समझौता नहीं होने देंगे" था और अटल जी जीवनभर इस संकल्प पर अडिग रहे। उन्होंने कहा कि अटल जी पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा का व्रत और तपस्या मानते थे। उनके अनुसार दैनिक समाचार पत्र सूचना का, साप्ताहिक प्रचार का और मासिक पत्रिका विचार का माध्यम होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया यह वृत्तचित्र नई पीढ़ी को अटल जी के जीवन और राष्ट्रसेवा से प्रेरणा देगा।

विशिष्ट अतिथि डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने अपने संबोधन में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताए दशकों पुराने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि अटल जी ने जीवनभर अपने सिद्धांतों और विचारों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने बताया कि जनता पार्टी सरकार के दौर में जब कुछ राजनीतिक शक्तियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया, तब अटल जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि "हमारी नाल संघ से जुड़ी है, हम संघ से अलग कैसे हो सकते हैं।" संसद में भी उन्होंने साफ कहा था कि वे ऐसी किसी सरकार का हिस्सा नहीं बन सकते जो उन्हें अपने विचारों से समझौता करने के लिए मजबूर करे।

डॉ. जोशी ने अपने शिक्षा मंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि जब स्कूलों में सरस्वती वंदना को लेकर विवाद खड़ा किया गया, तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दृढ़ता से कहा था कि "सरस्वती वंदना हमारी सरकार में नहीं होगी तो फिर किस सरकार में होगी? यह अवश्य होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि अटल जी भारतीय संस्कृति, शिक्षा और सभ्यता के संरक्षण के साथ-साथ विलुप्त सरस्वती नदी के शोध एवं पुनर्स्थापना जैसे विषयों को लेकर भी पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि आज देश को अटल जी जैसी दूरदृष्टि, समावेशी सोच और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली कार्यशैली की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों और बुद्धिजीवियों ने 'अमिट अटल' वृत्तचित्र की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन, विचारों और राष्ट्रसेवा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाला एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी प्रयास बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह वृत्तचित्र केवल अटल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व का दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, वैचारिक प्रतिबद्धता और मूल्य आधारित सार्वजनिक जीवन का सशक्त संदेश भी है। पूरे कार्यक्रम का वातावरण अटल जी के विचारों, उनके आदर्शों और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की प्रेरणा से ओत-प्रोत रहा।।