लखनऊ :
फर्जी 'Apple Customer Support' के नाम पर अमेरिका में साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार।
विदेशी नागरिकों को सरकारी अधिकारी बनकर डराते थे, हवाला के जरिए भारत पहुंचता था करोड़ों का नेटवर्क।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना विभूति खण्ड इलाके मे एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का केंद्र बनता दिखाई दिया। विभूतिखंड पुलिस एवं साबर क्राइम सेल टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आधी रात संचालित किए गए 'ऑपरेशन CY-VAJRA' में एक ऐसे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया, जो कथित तौर पर अमेरिका के नागरिकों को 'Apple Customer Support' के नाम पर जाल में फंसाकर लाखों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने मौके से गिरोह के मास्टरमाइंड सहित चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नकदी और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
विस्तार :
DCP पूर्वी डाँ० दीक्षा ने जानकारी देते हुए बताया कि फर्जी अन्तर्राष्ट्रीय काल सेन्टर की आड़ मे विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते हुए साइबर ठगी की सूचना मिलने पर साइबर क्राइम ब्रांच एवं तीन थानों की पुलिस टीम की गठित टीम ने थाना विभूति खण्ड क्षेत्र साइबर हाइट बिल्डिंग चतुर्थ तल के फ्लैट पर योजनाबद्ध तरीके से आधी रात को छापेमारी की गई। जहां इलेक्ट्रॉनिक लॉक खोलकर अंदर प्रवेश किया गया तो पूरा फ्लैट एक हाईटेक कॉल सेंटर के रूप में संचालित होता मिला, जहां विदेशी नागरिकों से लगातार ऑनलाइन संपर्क कर आनलाइन साइबर धोखाधड़ी का खेल चल रहा था। पूछताछ के उपरांत संतोष जनक उत्तर न मिलने पर चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरु हुई तो चौकाने वाला मामला सामने आया।
ऐसे रचते थे साइबर ठगी का पूरा खेल ।
जांच में सामने आया कि गिरोह ने इंटरनेट पर फर्जी Apple Customer Support वेबसाइट तैयार कर उसका ऑनलाइन प्रचार कराया था। वेबसाइट पर प्रदर्शित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने वाले विदेशी नागरिकों की कॉल सीधे लखनऊ स्थित कॉल सेंटर में पहुंचती थी। यहां मौजूद एजेंट पहले ग्राहक का भरोसा जीतते और फिर वरिष्ठ कॉलर खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसी, FTC अथवा न्यायिक अधिकारी बताकर पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई का भय दिखाते थे। इसके बाद विभिन्न तरीकों से उनसे धन ऐंठने का प्रयास किया जाता था।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े थे तार।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि ठगी से प्राप्त धन विदेश में मौजूद गिरोह के अन्य सदस्यों के माध्यम से एकत्र किया जाता था और बाद में हवाला चैनल के जरिए भारत पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल कड़ियों को खंगाल रही हैं।
चार मुख्य संचालक गिरफ्तार।
पुलिस ने छापेमार कार्रवाई के दौरान कॉल सेंटर के कथित मास्टरमाइंड सूरज त्रिपाठी, उसके सहयोगी विवेक पाण्डेय और राहुल त्रिपाठी तथा तकनीकी संचालन संभालने वाले आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को गिरफ्तार किया। पूछताछ में गिरोह के संचालन और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
हाईटेक कॉल सेंटर से भारी बरामदगी।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 31 लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, 32 कंप्यूटर माउस, दो राउटर, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और एक कार से ₹18.50 लाख नकद बरामद किए। इसके अलावा फर्जी वेबसाइट, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
देश के कई राज्यों और नेपाल से बुलाए गए थे एजेंट
मौके पर कुल 35 कॉलिंग एजेंट कार्यरत मिले। इनमें उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत नेपाल के युवक-युवतियां भी शामिल थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इनमें से किन कर्मचारियों को गिरोह की वास्तविक गतिविधियों की जानकारी थी और कौन केवल नौकरी के नाम पर यहां काम कर रहे थे।
DCP पूर्वी का कहना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के आधार पर इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी तकनीकी सहायता या कस्टमर सपोर्ट के लिए केवल अधिकृत वेबसाइट और सत्यापित हेल्पलाइन नंबर का ही उपयोग करें।
