गौतमबुद्धनगर: 100 करोड़ के नोएडा इंडोर स्टेडियम पर सुरक्षा के गंभीर सवाल: बिना फायर एनओसी बड़े आयोजन की तैयारी, जवाबदेही किसकी?
दो टूक//नोएडा। नोएडा के सेक्टर-21ए स्थित इंडोर स्टेडियम एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक खेल परिसर में सुरक्षा मानकों और संचालन व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप हैं कि स्टेडियम का संचालन करने वाली एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं और आवश्यक सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए संचालन जारी रखा हुआ है।
मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इस इंडोर स्टेडियम में प्रतिदिन करीब एक हजार खिलाड़ी विभिन्न खेलों का अभ्यास करने पहुंचते हैं। ऐसे में यदि अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन नहीं किया गया है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जिस एजेंसी को स्टेडियम के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई, उसने टेंडर हासिल करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और प्रतिष्ठित खिलाड़ियों के नामों का सहारा लेकर पात्रता हासिल की। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह पूरे टेंडर सिस्टम और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल अग्नि सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि स्टेडियम के पास अग्निशमन विभाग की वैध फायर एनओसी (No Objection Certificate) नहीं है। यदि यह सही है तो प्रतिदिन बड़ी संख्या में खिलाड़ियों और लोगों की मौजूदगी के बीच यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है।
इसी बीच आगामी 1 अगस्त को इसी इंडोर स्टेडियम में एक बड़े म्यूजिकल कॉन्सर्ट के आयोजन की तैयारी चल रही है। कार्यक्रम में कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि यदि आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ है तो इतनी बड़ी भीड़ वाले आयोजन की अनुमति किस आधार पर दी गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या संचालन एजेंसी, नोएडा प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग या फिर वह संबंधित अधिकारी जिसने इस आयोजन की अनुमति दी? यह स्टेडियम थाना सेक्टर-24 क्षेत्र के अंतर्गत आता है और अब निगाहें संबंधित विभागों पर हैं कि वे इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई और क्या जवाब देते हैं।।
