शनिवार, 13 जून 2026

मऊ :जनता की आवाज -पूर्वांचल को राजनीति नहीं,रोजगार चाहिए।||Mau:Voice of the People - Purvanchal needs employment, not politics.||

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मऊ :
जनता की आवाज -पूर्वांचल को राजनीति नहीं,रोजगार चाहिए।
।।देवेन्द्र कुशवाहा ।।
दो टूक : मऊ - -जब कोई उद्योग खत्म होता है, तो सिर्फ एक कारोबार बंद नहीं होता, बल्कि उसके साथ हजारों सपने भी दम तोड़ने लगते हैं। मशीनों की आवाज़ थमने के साथ ही रोजगार के अवसर कम हो जाते हैं, परिवारों की आय प्रभावित होती है और युवाओं का भविष्य अनिश्चितता के अंधेरे में खोने लगता है।
कभी मऊ, मुबारकपुर और बनारस की पहचान उनके विश्व प्रसिद्ध बुनकरी और साड़ी उद्योग से होती थी। यहां के करघों की खनक सिर्फ कपड़ा नहीं बुनती थी, बल्कि लाखों परिवारों की खुशहाली और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती थी। देश-विदेश तक पहुंच रखने वाला यह उद्योग पूर्वांचल की शान माना जाता था।
लेकिन बदलते समय, बढ़ती लागत, आधुनिक संसाधनों की कमी और उचित प्रोत्साहन के अभाव में यह गौरवशाली उद्योग धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया। नतीजा यह हुआ कि रोजगार के अवसर घटे और बड़ी संख्या में युवाओं को अपने घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों और राज्यों में काम की तलाश में जाना पड़ा।
आज भी पूर्वांचल के गांवों और कस्बों में हजारों ऐसे परिवार हैं, जिनकी आंखों में करघों के सुनहरे दिनों की यादें और बेहतर भविष्य की उम्मीदें जीवित हैं। उनका मानना है कि यदि स्थानीय उद्योगों को नई तकनीक, बेहतर बाजार और सरकारी सहयोग मिले, तो यह क्षेत्र फिर से रोजगार और विकास का केंद्र बन सकता है।
पूर्वांचल की असली ताकत उसके मेहनतकश हाथ हैं, न कि केवल चुनावी भाषण।
जरूरत ऐसी नीतियों की है जो उद्योगों को पुनर्जीवित करें, युवाओं को रोजगार दें और पलायन की मजबूरी को समाप्त करें।
क्योंकि जब उद्योग बचते हैं, तो सिर्फ कारोबार नहीं चलता—
रोजगार चलता है, परिवार चलते हैं, सपने चलते हैं और पूरा क्षेत्र आगे बढ़ता है।
पूर्वांचल को वादे नहीं, अवसर चाहिए।
राजनीति नहीं, रोजगार चाहिए।