गुरुवार, 11 जून 2026

लखनऊ : नाबालिगों की पैतृक भूमि के दाखिल-खारिज पर उठे सवाल, तहसीलदार न्यायिक के आदेश से मचा हड़कम्प।।||Lucknow: Questions have been raised regarding the mutation of ancestral land belonging to minors, and the order of the Tehsildar Judicial has caused a stir.||

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लखनऊ : 
नाबालिगों की पैतृक भूमि के दाखिल-खारिज पर उठे सवाल, तहसीलदार न्यायिक के आदेश से मचा हड़कम्प।।
दो टूक : लखनऊ मोहनलालगंज मे तीन साल पहले खारिज हो चुके प्रकरण में फिर हुआ म्यूटेशन, अधिवक्ताओं ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है
विस्तार:
मोहनलालगंज तहसील प्रशासन की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। तहसील क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में नाबालिग बच्चों के नाम दर्ज पैतृक भूमि के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) का मामला सामने आने के बाद तहसील परिसर से लेकर अधिवक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। तहसीलदार न्यायिक द्वारा पारित हालिया आदेश पर स्थानीय नागरिकों और अधिवक्ताओं ने गंभीर आपत्ति जताते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार मस्तेमऊ गांव के एक व्यक्ति के असामयिक निधन के बाद उनकी कृषि भूमि का नामांतरण नियमानुसार उनकी पत्नी और तीन नाबालिग बच्चों के नाम दर्ज किया गया था। राजस्व नियमों और विधिक विशेषज्ञों के अनुसार नाबालिग बच्चों के स्वामित्व वाली भूमि अथवा संपत्ति का विक्रय सक्षम न्यायालय की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।आरोप है कि कानूनी प्रावधानों की अनदेखी करते हुए संबंधित भूमि का बैनामा करा लिया गया और उसी बैनामे को आधार बनाकर तहसीलदार न्यायिक की अदालत ने 30 मई 2026 को दाखिल-खारिज का आदेश भी पारित कर दिया। इस आदेश के बाद अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों ने इसकी वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।अधिवक्ताओं का कहना है कि नाबालिगों के हितों की रक्षा के लिए कानून बेहद स्पष्ट और सख्त है। जिला न्यायालय की अनुमति के बिना नाबालिग की संपत्ति का हस्तांतरण विधि सम्मत नहीं माना जाता। ऐसे में इस आधार पर किए गए दाखिल-खारिज आदेश की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले को लेकर तहसील परिसर में इस बात की भी चर्चा है कि इसी भूमि के दाखिल-खारिज संबंधी एक प्रार्थना पत्र को वर्ष 2023 में तत्कालीन तहसीलदार न्यायिक ने नियमों के विपरीत पाते हुए निरस्त कर दिया था। ऐसे में अधिवक्ताओं का सवाल है कि जिस मामले को पहले खारिज किया जा चुका था, उसी प्रकरण में अब किस आधार पर दाखिल-खारिज का आदेश पारित किया गया।

अधिवक्ताओं और ग्रामीणों में आक्रोश
आदेश सार्वजनिक होने के बाद बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं तथा स्थानीय ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पूर्व में नाबालिगों की भूमि से जुड़े मामलों में राजस्व अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए आवेदन निरस्त किए हैं, लेकिन इस मामले में अलग रुख अपनाए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों और अधिवक्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी, लापरवाही अथवा सांठगांठ सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।