लखनऊ :
काॅरपोरेट धोखाधड़ी करने वाले साइबर जालसाजो के अन्तर्राष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाॅश,सरगना सहित चार गिरफ्तार।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना सुशान्त गोल्फ सिटी क्षेत्र के एक फ्लैट में साइबर जालसाज कार्पोरेट धोखाधड़ी का आफिस चला रहे थे । शिकायत मिलने पुलिस टीम ने सरगना समेतचार को गिरफ्तार कर अन्तर्राष्ट्रीय साइबर गैंग का खुलासा किया। गिरफ्तार जालसाजो के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया।
विस्तार :
एडीसीपी रल्लापल्ली वसंथ कुमार ने बताया बीते रविवार को सुशान्त गोल्फ सिटी पुलिस को सूचना मिली थी आवास विकास योजना के लाइट हाउस के ब्लाक में स्थित एक फ्लैट में कुछ लोग करोड़ो की साइबर ठगी करने का काम कर रहे है।सूचना पर विश्वास करते हुये अतिरिक्त निरीक्षक ने पुलिस टीम के साथ फ्लैट में छापेमारी कर चार संदिग्धो को हिरासत में लेने के साथ ही मौके से काफी संख्या में एटीएम कार्ड,चेकबुक,दर्जनो फोन समेत अन्य सामान बरामद किया।एडीसीपी ने बताया थाने लाकर पुलिस व साइबर सेल की टीमो ने कड़ाई से पुछताछ शुरू की तो गैंग के सरगना सत्येन्द्र सविता निवासी पीताम्बरनगर थाना कोतवाली उन्नाव ने बताया वो अपने साथियो निप्पु कुमार,मनीष कुमार,सन्नी कुमार निवासीगण सुगाॅवडीह थाना सुगौली जनपद पूर्वी चम्पारण,बिहार के साथ मिलकर बीते डेढ सालो से फर्जी तरीके कार्पोरेट कम्पनिया बनाकर आनलाइन लोगो को लाखो करोड़ो कमाने का लालच देकर साइबर ठगी करते थे,सरगना ने बताया साइबर ठगी की रकम को फर्जी खातो में ट्रांसफर कराकर रकम को आनलाइन ही निकाल लेते है।सरगना ने बताया साथियो संग मिलकर अब तक सात से आठ करोड़ रूपये की ठगी कर चुके है।एडीसीपी ने बताया साइबर जालसाजो के पास से 79चेक बुक,77एटीएम कार्ड,15एण्ड्रायड मोबाइल फोन,तीन आईकार्ड,6पीओएस मशीन,14कीपैड मोबाइल,29सिमकार्ड,तीन लैपटाॅप ,6स्टांप मोहर समेत अन्य जरूरी दस्तावेज बरामद हुये है।पकड़े गये जालसाजो के विरूद्व आनलाइन एनसीआरपी पोर्टल पर 718शिकायते दर्ज मिली है।पुलिस ने सरगना सहित चारो जालसाजो को बरामद माल के साथ न्यायालय में पेश किया।जहां से उन्हे जेल भेज दिया गया।
●चार चरणों में चलता था साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क...
साइबर अपराधियों का एक संगठित सिंडिकेट कॉरपोरेट म्यूल अकाउंट रिंग के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का काम कर रहा था। एसीपी रिषभ यादव ने बताया कि साइबर जालसाजों ने अपनी पहचान छिपाने और अवैध धन को वैध दिखाने के लिए बेहद सुनियोजित एवं बहुस्तरीय फाइनेंशियल साइबर क्राइम नेटवर्क तैयार किया था।एसीपी के अनुसार पूरे ऑपरेशन को चार चरणों में संचालित किया जाता था। पहले चरण में आइडेंटिटी थेफ्ट कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कॉरपोरेट शेल कंपनियां बनाई जाती थीं। दूसरे चरण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोक्योरमेंट (द किट) में बैंक खाते, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल उपकरण और अन्य संसाधन जुटाए जाते थे।
तीसरे चरण डिजिटल हैंडऑफ (सपोर्ट बाबा लेयर) में तैयार किए गए बैंक खाते, डिजिटल लॉगिन और अन्य संसाधनों को नेटवर्क के अलग-अलग सदस्यों के बीच सुरक्षित तरीके से हस्तांतरित किया जाता था, ताकि असली मास्टरमाइंड की पहचान छिपी रहे।
चौथे और अंतिम चरण लेयरिंग एंड मोनेटाइजेशन (कैश फ्लो) में साइबर ठगी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों और कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर कर उसकी वास्तविक स्रोत पहचान मिटाई जाती थी। इसके बाद रकम को नकद निकासी, खरीदारी अथवा अन्य माध्यमों से इस्तेमाल कर लिया जाता था।एसीपी ने बताया कि पूरे नेटवर्क का संचालन इस प्रकार किया गया था कि किंगपिन सीधे किसी भी वित्तीय लेन-देन में सामने न आए। पुलिस इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य आरोपियों और उनके बैंक खातों की जांच कर रही है तथा नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
●भोले भाले लोगो को जाल फसाकर खुलवाते थे खाते..
एसीपी रिषभ यादव ने बताया सरगना ने पुछताछ में बताया भोले भाले लोगो को महीने में अच्छा पैसा कमाने का लालच देकर उनकी आईडी व फोटो समेत अन्य जरूरी दस्तावेज लेकर विभिन्न बैंको में खाते खुलवाते थे ओर कार्पोरेट कम्पनियां भी बनवाते थे जिसके बाद उक्त कम्पियों के जरिये ही करोड़ो की ठगी का ताना बना बुनकर रकम को खातो में ट्रांसफर कराकर आनलाइन निकाल लेते थे ओर खाता धारक को उसके बदले दस बीस हजार रूपये दे देते थे।
गैंग में अन्य लोगो के शामिल होने की आंशका..
एडीसीपी रल्लापल्ली वसंथ कुमार ने बताया साइबर जालसाजो का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था,सरगना समेत चार लोगो के पकड़े जाने के बाद पुछताछ में पता चला है गैंग के कुछ सदस्य अन्य प्रदेशो में भी काम कर रहे है।जिनकी गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीमो को लगाया गया है,जल्द ही गिरफ्तार कर उन्हे भी जेल भेजा जायेगा।
