गुरुवार, 25 जून 2026

बिहार में भरत तिवारी के घर पहुंचे राष्ट्रीय छात्र पंचायत के पदाधिकारी, जताया विरोध

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भोजपुर/पटना- राष्ट्रीय छात्र पंचायत का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बिहार में पीड़ित परिवार के आवास पर 25 जून को पहुंचा। पीड़ित के घर के बाहर प्रशासन के सामने संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने गोण्डा के चर्चित छात्रनेता शिवम पांडेय के अगुवाई में तीखा आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान सम्राट सरकार और बिहार पुलिस के खिलाफ "बिहार सीएम मुर्दाबाद" और "बिहार पुलिस मुर्दाबाद" के नारे लगाए गए, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा। भारी जन-आक्रोश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने छात्र पंचायत के पदाधिकारियों को पीड़ित परिवार से मिलवाया। मौके पर रहे राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अद्द्यक्ष शिवम पांडेय ने कहा कि बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर (बिलाउटी गांव) में कुछ दिन पूर्व पुलिस द्वारा भरत भूषण तिवारी की गोली मारकर हत्या किए जाने को लेकर पीड़ित परिवार के यहां पहुंचकर हाल जाना गया और विरोध जताया गया। इस दौरान पीड़ित परिवार से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडेय ने सीधे तौर पर सूबे के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री सम्राट चौधरी को इस घटना का जिम्मेदार ठहराया! शिवम पांडे ने कहा की, "यह कोई एनकाउंटर नहीं है, बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इशारे पर की गई सीधी हत्या है। कहा कि गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास है और पूरी पुलिस उनके अधीन काम करती है। किसी भी इंस्पेक्टर या पुलिसकर्मी की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह बिना राजनैतिक आकाओं के आदेश के इस तरह सरेआम किसी को गोली मार दे। अगर सम्राट चौधरी से बिहार की कानून व्यवस्था और पुलिस नहीं संभल रही है, तो उन्हें नैतिक रूप से तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि गृह विभाग के मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री खुद इस कांड के असली कसूरवार हैं। 
लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष विवेक पांडेय ने पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा कि देश में जब आतंकवादी और नक्सलवादी भी सरेंडर करते हैं, तो प्रशासन उन्हें मुआवजा, घर और नौकरी देकर मुख्यधारा में लाने का काम करता है। यहाँ जब भरत तिवारी ने खुद वीडियो में हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, तो उसके बाद भी उसे गोली क्यों मारी गई? यह कृत्य साबित करता है कि बिहार पुलिस ने पहले से ही हत्या की योजना बना रखी थी! विवेक पांडे ने आगे कहा कि भरत तिवारी एक युवा क्रांतिकारी थे, जो क्षेत्र की समस्याओं पर लगातार आवाज उठा रहे थे। वहां के रूढ़िवादी नेताओं को एक नए और उभरते हुए युवा नेतृत्व का जन्म हजम नहीं हो रहा था, इसलिए सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें रास्ते से हटा दिया गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रनेता सत्यम शुक्ला ने एंकाउंटर वाली जगह पर पौधरोपण किया और कहा कि भरत तिवारी ने बीएससी की पढ़ाई की थी और एक पढ़ा-लिखा युवा जब समाज के नेतृत्व के लिए आगे आ रहा था, तो सत्ता में बैठे लोग भयभीत हो गए। राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने साफ किया है कि जब तक इस मामले में दोषियों को सख्त से सख्त सजा नहीं मिल जाती और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक संगठन चुप नहीं बैठेगा। इस आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक ले जाया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय छात्र पंचायत के प्रदेश अध्यक्ष आशु ओझा, प्रदेश महामंत्री मनीष पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अनीश पाल, अमन कुमार, अभिषेक कश्यप, हिमांशु तिवारी, अमन पटेल, अंकुर सिंह राजपूत सहित अन्य छात्रनेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।