गौतमबुद्धनगर: जिम्स अस्पताल में नियमितीकरण की मांग को लेकर चल रहे धरने में हंगामा, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर; कर्मचारियों ने लगाया दमन का आरोप!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक//ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरना बुधवार देर रात विवाद और हंगामे में बदल गया। धरनारत कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा, तोड़फोड़ और अस्पताल की सेवाओं को प्रभावित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली है। वहीं कर्मचारियों ने पुलिस पर धरना जबरन समाप्त कराने, बिजली बंद करने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं।
आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर जिम्स परिसर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों का आरोप है कि देर रात पुलिस और प्रशासन ने धरना समाप्त कराने का प्रयास किया, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि इस दौरान कुछ कर्मचारी घायल भी हुए।
वहीं पुलिस और प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। पुलिस के अनुसार जिम्स प्रबंधन, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा कई दौर की वार्ता कर कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया गया था। साथ ही उन्हें अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और मुख्य हॉल से हटकर किसी अन्य स्थान पर शांतिपूर्ण ढंग से धरना जारी रखने का अनुरोध किया गया था, ताकि मरीजों और चिकित्सा सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
पुलिस का कहना है कि अनुरोध के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी स्थान परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए और कुछ लोगों ने उग्र होकर हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि धरना स्थल पर बाहरी अराजक तत्वों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों को भी बुलाया गया, जिन्होंने अभद्र व्यवहार किया, धमकियां दीं और अस्पताल के गेट को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इस दौरान सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने और चिकित्सा सेवाओं में बाधा उत्पन्न करने की भी बात कही गई है।
पुलिस के मुताबिक जब कुछ कर्मचारी अस्पताल के भीतर दूसरे स्थान पर जाने के लिए तैयार हुए, तब कुछ अन्य लोगों द्वारा खींचातानी और धक्का-मुक्की की गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए संबंधित लोगों को वहां से हटाया। जिम्स के निदेशक की तहरीर के आधार पर राजकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करने तथा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, मारपीट या अभद्रता किए जाने के आरोप पूरी तरह असत्य हैं। अधिकारियों के अनुसार मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे और पूरी कार्रवाई शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई। पुलिस का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारी नेताओं और बाहरी तत्वों के हटने के बाद अस्पताल की ओपीडी समेत अन्य चिकित्सीय सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।
उधर कर्मचारी संगठनों ने इस कार्रवाई को आंदोलन दबाने की कोशिश बताते हुए अपनी मांगों पर अड़े रहने के संकेत दिए हैं। मामले को लेकर जिम्स प्रशासन, कर्मचारी संगठन और जिला प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल जिम्स परिसर में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।।
