गौतमबुद्धनगर: 25 बार डीएम कार्यालय की चौखट पर पहुंचा दलित किसान, फिर भी नहीं मिला न्याय; 5 बीघा जमीन पर कब्जे के आरोप से गरमाई जेवर की सियासत!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक//ग्रेटर नोएडा। जेवर तहसील क्षेत्र के झुप्पा गांव में एक दलित किसान ने अपनी पांच बीघा पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक उदासीनता के गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित किसान का दावा है कि गांव के एक हिस्ट्रीशीटर और उसके परिवार ने पिछले सात महीने से उसकी जमीन पर कब्जा कर रखा है। इंसाफ की तलाश में वह अब तक करीब 25 बार जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा चुका है, लेकिन उसे अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है।
पीड़ित के अनुसार, विवादित भूमि उसके पूर्वजों की संपत्ति है और परिवार वर्षों से उस पर खेती करता आ रहा है। किसान का कहना है कि मामले की जांच के दौरान लेखपाल की रिपोर्ट में भी भूमि उसके नाम दर्ज होने और उसके कब्जे की पुष्टि की गई थी। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कब्जा हटाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
किसान ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने निष्पक्ष रवैया नहीं अपनाया। उसने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने तथा शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने तक के आरोप लगाए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस बीच, जेवर एसडीएम दुर्गेश सिंह से जुड़ी एक कथित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। ऑडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसके सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित किसान का कहना है कि उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं और उसे फर्जी मुकदमों में फंसाए जाने का भय सता रहा है। उसने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। किसान ने चेतावनी दी कि यदि उसे समय रहते न्याय नहीं मिला तो वह आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकता है।
दलित किसान की जमीन से जुड़े इस विवाद ने अब प्रशासनिक संवेदनशीलता, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे मामले में जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
