शनिवार, 13 जून 2026

गौतमबुद्धनगर: 117 करोड़ के नोएडा मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई: SIT की जांच के बाद 6 FIR दर्ज, प्राधिकरण के अधिकारियों समेत कई आरोपी नामजद!!

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गौतमबुद्धनगर: 117 करोड़ के नोएडा मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई: SIT की जांच के बाद 6 FIR दर्ज, प्राधिकरण के अधिकारियों समेत कई आरोपी नामजद!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा। बहुचर्चित 117 करोड़ रुपये के कथित मुआवजा घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले में शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने नोएडा के फेज-1 थाने में छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई हैं। इन मुकदमों में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और उनके कथित सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला गेझा तिलपताबाद गांव की भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजे से संबंधित है। आरोप है कि किसानों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर मुआवजे की करोड़ों रुपये की राशि का गबन किया गया। जांच में सामने आया कि दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर सरकारी धन को गलत तरीके से निकाल लिया गया।

एसआईटी की जांच में नोएडा प्राधिकरण के तीन अधिकारियों समेत कई लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई है। दर्ज एफआईआर में राजेश कुमार, दिनेश कुमार और वीरेंद्र नागर सहित अन्य आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें प्राधिकरण के तीन लॉ ऑफिसर भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन पर अपने पद का दुरुपयोग कर घोटाले को अंजाम देने में सहयोग करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

बताया जा रहा है कि यह कथित घोटाला वर्ष 2015 में हुआ था, जबकि 2021 में मामला उजागर हुआ। इसके बाद पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच प्रक्रिया को गति मिली, जिसके तहत एसआईटी ने विभिन्न पहलुओं की गहन जांच की।

एडीजी तरुण गाबा की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने राजस्व अभिलेखों, बैंक खातों और मुआवजा वितरण से संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर नोएडा के फेज-1 थाने में छह अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए।

जांच एजेंसियों के अनुसार, किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि को हड़पने के लिए फर्जीवाड़े का एक संगठित तंत्र तैयार किया गया था, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड और बैंकिंग प्रक्रियाओं का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

117 करोड़ रुपये के इस कथित मुआवजा घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के बाद नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा वितरण की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, एसआईटी की इस कार्रवाई को मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कानून के दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।।