गुरुवार, 14 मई 2026

गौतमबुद्धनगर: महर्षि संस्थान की जमीन घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT जांच के आदेश से मचा हड़कंप!!

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गौतमबुद्धनगर: महर्षि संस्थान की जमीन घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT जांच के आदेश से मचा हड़कंप!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

फर्जी दस्तावेजों से जमीन बिक्री के आरोपों की होगी गहन जांच, तीन महीने में रिपोर्ट तलब

दो टूक// नोएडा/नई दिल्ली। आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से स्थापित स्पिरिचुअल रिजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (महर्षि महेश योगी संस्थान) की करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री और फर्जीवाड़े के मामले में उच्चतम न्यायालय ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने महर्षि संस्थान के श्रीकांत ओझा द्वारा दायर अपील स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संस्थान की जमीनों के अनधिकृत हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध सौदों की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच कराई जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में संस्थान की संपत्तियों से जुड़े विवाद और आपराधिक मामले पहले से लंबित हैं। इसके बावजूद जमीनों की खरीद-फरोख्त जारी रहने पर अदालत ने गहरी नाराजगी जाहिर की।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि गठित SIT उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में कार्य करेगी तथा इसमें रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। अदालत ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तर की निगरानी आवश्यक है।

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(3) के तहत जांच रिपोर्ट दाखिल करने से रोका गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक जांच को इस प्रकार बाधित करना न्यायहित में उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि जांच शीघ्र पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए तथा सभी आरोपी पक्ष जांच में पूरा सहयोग करें।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र या आपराधिक मंशा (Mens Rea) के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने SIT को तीन महीने के भीतर अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम Court ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि महर्षि महेश योगी ने अपने संस्थान की संपत्तियों को आध्यात्मिक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए स्थापित किया था, न कि उन्हें विवादों, अवैध कब्जों और फर्जी सौदों का माध्यम बनाने के लिए। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामले में जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है और अब SIT जांच से कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।।