गुरुवार, 14 मई 2026

गौतमबुद्धनगर: PMEGP सब्सिडी लोन के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा, 6 शातिर गिरफ्तार!!

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गौतमबुद्धनगर: PMEGP सब्सिडी लोन के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा, 6 शातिर गिरफ्तार!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//गौतमबुद्धनगर। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की थाना बिसरख पुलिस और साइबर सेल टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सब्सिडी लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के छह शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त 18 की-पैड मोबाइल फोन, 6 स्मार्ट फोन तथा 15 कॉलिंग डाटा रजिस्टर बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, दिनांक 13 मई 2026 को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर थाना बिसरख पुलिस एवं साइबर सेल टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सेक्टर-1 स्थित कृष्णा काउंटी टॉवर-ए की छत से छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर के रूप में हुई है। सभी आरोपी मूल रूप से कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं।

जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं लोन संबंधी आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता था, उसके सामने गिरोह द्वारा जारी मोबाइल नंबर दिखाई देता था। इसके बाद आरोपी स्वयं को सरकारी योजना से जुड़े लोन अधिकारी बताकर पीड़ितों को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सब्सिडी आधारित होम लोन दिलाने का भरोसा देते थे।

गिरोह के सदस्य फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, बीमा शुल्क और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ितों से दो लाख से चार लाख रुपये तक अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते थे। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने इसी तरीके से देशभर में कई लोगों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

पूछताछ में अभियुक्तों ने खुलासा किया कि वे पहचान छिपाने के लिए लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे और बातचीत के लिए मुख्य रूप से की-पैड मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। पूरे गिरोह का संचालन एक कथित “बॉस” के निर्देश पर किया जाता था, जिससे आरोपी मोबाइल फोन के जरिए संपर्क में रहते थे। ठगी से प्राप्त धनराशि विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर नेटवर्क के माध्यम से बांटी जाती थी।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ थाना बिसरख में मु0अ0सं0-304/2026 के तहत धारा 319(2), 318(4) बीएनएस एवं 66डी आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

साइबर अपराधियों के इस संगठित नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर चल रहे लोन और सरकारी योजना संबंधी विज्ञापनों के झांसे में न आएं तथा किसी भी प्रकार का शुल्क जमा करने से पहले संबंधित संस्था और योजना की सत्यता की जांच अवश्य करें।।