गुरुवार, 7 मई 2026

लखनऊ : अयोमा फाउन्डेशन ट्रस्ट का बड़ा आयोजन,भक्ति में डूबा अभनापुर।||Lucknow: A big event organized by Ayoma Foundation Trust, Abhanpur immersed in devotion.||

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लखनऊ : 
अयोमा फाउन्डेशन ट्रस्ट का बड़ा आयोजन,भक्ति में डूबा अभनापुर।
विनीत श्रीवास्तव बने चर्चा का केंद्र।
दो टूक : धर्म, आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब अयोमा फाउन्डेशन ट्रस्ट द्वारा अभनापुर पोस्ट-गोडा देवरिया में भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। पूरे क्षेत्र में जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत सुंदरकांड पाठ से हुई, जो प्रातः 9 बजे प्रारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति के साथ हनुमान जी की आराधना की। इसके बाद सुबह 11 बजे से विशाल भंडारे की शुरुआत हुई, जो देर तक श्रद्धालुओं की सेवा में चलता रहा। दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने बजरंगबली का प्रसाद ग्रहण कर आयोजन की भव्यता की सराहना की।
रात्रि 8 बजे से शुरू हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनमोहक झांकियों ने लोगों का दिल जीत लिया। धार्मिक प्रस्तुतियों ने सनातन संस्कृति की महिमा को जीवंत कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
इस पूरे आयोजन के केंद्र में रहे ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं एडवोकेट विनीत श्रीवास्तव, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विनीत श्रीवास्तव केवल सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाले युवा नेतृत्व के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
विनीत श्रीवास्तव ने कहा कि “धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। हमारा प्रयास है कि सनातन संस्कृति की परंपराएं नई पीढ़ी तक मजबूती से पहुंचें और समाज में भाईचारा कायम रहे।”
इस आयोजन को सफल बनाने में विपिन श्रीवास्तव, विनय श्रीवास्तव, सूरज श्रीवास्तव, आशुतोष श्रीवास्तव उर्फ रक्षित, सत्यम श्रीवास्तव, ललितेश श्रीवास्तव, अमित बाजपेई, कमलेश मिश्रा, शिवम बाजपेई सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासियों, सहयोगियों और मित्रगणों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अभनापुर में हुए इस भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के लिए आगे बढ़ता है, तो आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआस्था का उत्सव बन जाता है।