गाज़ियाबाद: विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस पर सजी विरासत और कला की भव्य शाम!!
कला कल्प के मंच से उठी कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की आवाज, रिसर्च काउंसिल का भी शुभारंभ
दो टूक//गाजियाबाद।
विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस के अवसर पर कला, संस्कृति, शिक्षा और भारतीय विरासत का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान द्वारा जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस में एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कलाकारों के भविष्य, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और युवाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।
इस अवसर पर सैन्य, शैक्षणिक और सांस्कृतिक जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल अरविंद महाजन, इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक डॉ. के.जी. सुरेश, जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस के निदेशक डॉ. तपन कुमार नायक, आईजीएनसीए के डीन डॉ. रमेश चंद्र गौर, सुप्रसिद्ध संगीतकार उस्ताद कमाल साबरी तथा केरल लोकसाहित्य अकादमी के प्रतिनिधि पी.वी. लवलीन द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान की संस्थापक निदेशक डॉ. अतसी मिश्रा ने मुख्य वक्तव्य देते हुए वैश्वीकरण और डिजिटल युग में भारतीय कला एवं विरासत के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी कला को वैश्विक मंच देने का महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में कलाकारों की आर्थिक मजबूती अत्यंत आवश्यक है। यदि कलाकार आर्थिक रूप से सक्षम होंगे, तभी हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर जीवित रह पाएंगी। उन्होंने कला और तकनीक के समन्वय को समय की आवश्यकता बताते हुए कलाकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने का आह्वान किया।
इसके बाद कला कल्प के उपाध्यक्ष एवं आरएसएस स्वयंसेवक मोहित माधव ने “कल्चर मैटर्स” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति और संस्कारों से होती है। भारतीय संस्कृति को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी केवल संस्थानों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को बचपन से ही देश के इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। उन्होंने परिवार और समाज को सांस्कृतिक शिक्षा का पहला केंद्र बताते हुए कहा कि संस्कार घर से शुरू होते हैं।
कार्यक्रम में आयोजित पैनल डिस्कशन ने आयोजन को और अधिक सार्थक बना दिया। परिचर्चा के दौरान डॉ. के.जी. सुरेश ने सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर विस्तार से विचार रखते हुए कलाकारों से बहुमुखी प्रतिभा विकसित करने और लगातार नई रचनात्मक सामग्री तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कला जगत में दर्शकों की रुचि बनाए रखने के लिए नवाचार बेहद आवश्यक है।
संगीतकार उस्ताद कमाल साबरी ने भारतीय कला के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वैश्विक पहचान प्राप्त करने के बावजूद किसी कलाकार की असली ताकत उसके निरंतर अभ्यास और समर्पण में ही निहित होती है।
केरल लोकसाहित्य अकादमी के प्रतिनिधि पी.वी. लवलीन ने बताया कि केरल सरकार जनजातीय और लोक परंपराओं के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और पुनर्जीवन के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। वहीं डॉ. रमेश चंद्र गौर और डॉ. तपन नायक ने कला एवं संस्कृति के अकादमिक पक्ष को मजबूती प्रदान करते हुए शोध और अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजन के दौरान कला कल्प संस्थान ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से “कला कल्प रिसर्च काउंसिल” का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य प्रदर्शन कला के क्षेत्र में शोध, अध्ययन और संरचित शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
इसके साथ ही संस्थान ने प्रदर्शन कला शिक्षा और दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने की घोषणा भी की। इस उपलब्धि पर उपस्थित अतिथियों ने संस्थान को बधाई देते हुए इसे भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए सकारात्मक पहल बताया।
शाम का समापन रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। शास्त्रीय नृत्यांगना दीपशिखा ने ओडिसी और आयुषी ने कत्थक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदर अभिव्यक्तियों और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को तालियों से गूंजा दिया।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय विरासत, कला और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक गंभीर और प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आया।।
