गौतमबुद्धनगर: बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज: डीएम की सख्ती—हर विभाग दे समयबद्ध एक्शन प्लान, लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
गौतम बुद्ध नगर, 05 मई 2026।
जनपद में संभावित बाढ़ संकट को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बाढ़ समिति की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में तैयारियों का गहन मूल्यांकन किया गया। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग तत्काल प्रभाव से अपनी-अपनी विस्तृत एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के दौरान सिंचाई विभाग द्वारा यमुना नदी से प्रभावित संभावित क्षेत्रों और गांवों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, समन्वय और मजबूत रणनीति बेहद जरूरी है। उन्होंने सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि, लोक निर्माण, विद्युत, जल निगम, अग्निशमन और आपूर्ति विभाग सहित सभी एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि हर स्तर पर जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और कार्य योजना जमीनी स्तर पर लागू की जाए।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सख्त रुख
डीएम ने अधिसूचित क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और जोखिमपूर्ण गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। धारा 10 के तहत नोटिस जारी करने और नियमों के विरुद्ध निर्माण कार्य करने वालों के खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए गए। बैठक में तीनों विकास प्राधिकरणों के एसीईओ की अनुपस्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए जवाबदेही तय करने के संकेत दिए।
बाढ़ नियंत्रण के लिए अहम निर्देश
जिलाधिकारी ने बाढ़ पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, तटबंधों के नियमित निरीक्षण व मरम्मत, बाढ़ चौकियों की स्थापना और नालों की समय से सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों के लिए ठोस रणनीति बनाते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
गौशालाओं और फसलों की सुरक्षा पर फोकस
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए गए कि डूब क्षेत्र में संचालित सभी सरकारी और गैर-सरकारी गौशालाओं की मैपिंग कर आवश्यक तैयारियां पूरी करें। साथ ही पर्याप्त भूसे की व्यवस्था और अस्थायी गौशालाओं के लिए स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।
वहीं जिला कृषि अधिकारी को बाढ़ से फसलों की सुरक्षा के लिए अग्रिम योजना बनाने को कहा गया।
स्वास्थ्य सेवाएं रहेंगी अलर्ट मोड पर
स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया कि रैपिड रिस्पांस टीम और मेडिकल टीमों को बाढ़ चौकियों पर तैनात रखा जाए तथा एंबुलेंस में पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
बिजली, पानी और सड़क व्यवस्था पर विशेष ध्यान
विद्युत विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल निगम को सभी हैंडपंपों को दुरुस्त करने और आवश्यक स्थानों पर नए हैंडपंप लगाने को कहा गया। वहीं लोक निर्माण विभाग को सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
समन्वय ही सफलता की कुंजी
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की संसाधन कमी की सूचना तत्काल प्रशासन को दी जाए, ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अतुल कुमार, उप जिलाधिकारी सदर आशुतोष गुप्ता, मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे, डिप्टी सीएमओ डॉ. टीकम सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और एनडीआरएफ के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
जिलाधिकारी की सख्ती और स्पष्ट दिशा-निर्देशों से यह साफ है कि प्रशासन बाढ़ को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही के मूड में नहीं है। समय रहते मजबूत तैयारियां कर जनपद को संभावित आपदा से सुरक्षित रखने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।।
