मंगलवार, 5 मई 2026

गौतमबुद्धनगर:“मां के त्याग को सलाम: ‘एक सम्मान माँ के नाम’ कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों और उनकी माताओं को मिला सम्मान”!!

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गौतमबुद्धनगर:“मां के त्याग को सलाम: ‘एक सम्मान माँ के नाम’ कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों और उनकी माताओं को मिला सम्मान”!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा। सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन द्वारा “एक सम्मान माँ के नाम” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दिव्यांग बच्चों की माताओं के त्याग, बलिदान और समर्पण को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उन माताओं के प्रति समाज का आभार व्यक्त करना था, जो अपने बच्चों के जीवन को संवारने में दिन-रात समर्पित रहती हैं।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के निदेशक डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि फाउंडेशन का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों को समाज में सम्मान और पहचान दिलाना भी है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उनके अभिभावकों को भी समाज में एक नई पहचान मिलती है।

इस अवसर पर जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकतानुसार उपकरण और अध्ययन सामग्री वितरित की गई। इनमें कूलर, पंखे, इलेक्ट्रॉनिक बुक, पज़ल, वॉकर, स्टिक और सीपी चेयर जैसी उपयोगी वस्तुएं शामिल थीं। साथ ही फाउंडेशन के बच्चों द्वारा स्वयं तैयार किए गए हैंडवॉश और ग्लास क्लीनर को उपहार के रूप में भेंट किया गया, जिससे आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया गया।

कार्यक्रम में बच्चों और उनके अभिभावकों को स्वरोजगार के प्रति भी प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों द्वारा माता-पिता को घर पर बच्चों की एक्सरसाइज कराने की ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे अपने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। खासतौर पर माताओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया, जिससे वे खुद स्वस्थ रहकर बच्चों की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. त्रिभुवन सिंह ने फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “महिलाओं का सम्मान ही एक स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव है। आज इस मंच पर हमने उसी भावना को साकार होते देखा है।”

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब फाउंडेशन की टीम ने अपने हाथों से बच्चों को भोजन कराया। इस पल को संस्था ने अपने लिए गर्व और आत्मसंतोष का क्षण बताया।

अंत में संस्था ने संदेश दिया कि दिव्यांग बच्चे और उनकी माताएं समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्हें केवल थोड़े से सहयोग, सम्मान और अवसर की आवश्यकता है, ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें।