गौतमबुद्धनगर: सलारपुर में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई क्रांतिकारी वीर विजय सिंह पथिक की जयंती!!
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के कार्यक्रम में किसानों के मसीहा को किया नमन, जिलाध्यक्ष अशोक भाटी बोले— पथिक का संघर्ष आज भी देता है अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा
दो टूक//नोएडा, 28 मई 2026।
सलारपुर स्थित अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के जिला कार्यालय पर गुरुवार को महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी और किसान आंदोलन के जनक वीर विजय सिंह पथिक की जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवी, गणमान्य लोग और युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। उपस्थित सभी लोगों ने वीर विजय सिंह पथिक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष अशोक भाटी ने वीर विजय सिंह पथिक के जीवन संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विजय सिंह पथिक केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और शोषित वर्ग की आवाज थे। उनका पूरा जीवन देश, समाज और किसानों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा।
अशोक भाटी ने कहा कि पथिक जी का जन्म 27 फरवरी 1882 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद के गुलावठी में हुआ था। उनका वास्तविक नाम भूप सिंह था, लेकिन अंग्रेजों की गिरफ्तारी से बचने और क्रांतिकारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपना नाम बदलकर विजय सिंह पथिक रख लिया। “पथिक” शब्द का अर्थ राही होता है और उन्होंने सचमुच अपना जीवन राष्ट्रसेवा की राह पर समर्पित कर दिया।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के बिजौलिया किसान आंदोलन में विजय सिंह पथिक की भूमिका ऐतिहासिक रही। उस समय किसानों पर 84 प्रकार के अन्यायपूर्ण कर लगाए जाते थे। पथिक जी ने किसानों को संगठित कर “नहीं देंगे लगान” का नारा दिया और करीब नौ वर्षों तक चले इस आंदोलन के परिणामस्वरूप 35 प्रकार के कर समाप्त करवाए गए। यह आंदोलन देश के सबसे सफल और ऐतिहासिक किसान आंदोलनों में गिना जाता है तथा महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से पहले का प्रभावी सत्याग्रह माना जाता है।
अशोक भाटी ने कहा कि वर्ष 1915 में पथिक जी ने क्रांतिकारी रास बिहारी बोस के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ बड़ी क्रांति की योजना बनाई थी। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से भी अंग्रेजी हुकूमत और सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। राजस्थान केसरी और तरुण राजस्थान जैसे समाचार पत्रों में उनके लेख समाज में जागरूकता फैलाने का काम करते थे। उनके निर्भीक लेखन के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
उन्होंने बेगूं किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों के हक की लड़ाई में विजय सिंह पथिक हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। बेगूं आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में रूपाजी और कृपाजी धाकड़ शहीद हो गए, लेकिन पथिक जी ने आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ने दिया और किसानों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया।
जिलाध्यक्ष अशोक भाटी ने कहा कि आज के समय में भी वीर विजय सिंह पथिक का जीवन युवाओं और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संघर्ष हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, समाज को संगठित रखने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारियों की जयंती केवल औपचारिकता नहीं बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का माध्यम है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुभाष भाटी, सुरेश प्रधान, मनोज त्यागी, सुमित खारी, धर्मन भाटी, चरणसिंह भाटी, सिंहराज गुर्जर, हरेंद्र गुर्जर, सुंदर गुर्जर, जगबीर भाटी, रघुराज राठी, सुनील नागर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।।
