शनिवार, 30 मई 2026

गौतमबुद्धनगर: डिजिटल अरेस्ट गैंग पर साइबर पुलिस का बड़ा प्रहार: 1.29 करोड़ की ठगी में बैंक खाते सप्लाई करने वाला आरोपी गिरफ्तार!!

शेयर करें:

गौतमबुद्धनगर: डिजिटल अरेस्ट गैंग पर साइबर पुलिस का बड़ा प्रहार: 1.29 करोड़ की ठगी में बैंक खाते सप्लाई करने वाला आरोपी गिरफ्तार!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// नोएडा। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों के लिए मजदूरों और अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें मोटी रकम के बदले उपलब्ध कराता था।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को फोन कर स्वयं को ट्राई (TRAI), मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसके मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो भेजे गए हैं और मामले की जांच चल रही है। इसके बाद उसे “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर मानसिक दबाव बनाया गया और जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में 1 करोड़ 29 लाख 61 हजार 962 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना नोएडा में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह से जुड़े एक अन्य आरोपी आकाश (21 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली के निहाल विहार थाना क्षेत्र का निवासी है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी आकाश साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। वह मजदूरों और अन्य लोगों को लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता था और बाद में प्रत्येक खाते को लगभग 50 हजार रुपये में साइबर ठगों को बेच देता था। पुलिस पूछताछ में यह भी पता चला है कि वह अब तक करीब 12 बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा चुका है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के स्वयं के बैंक खाते के खिलाफ भी देश के विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की कुल 13 शिकायतें दर्ज हैं। इनमें कर्नाटक से चार, महाराष्ट्र से तीन, केरल से दो तथा तेलंगाना, हरियाणा और गुजरात से एक-एक शिकायत शामिल है। इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी लंबे समय से साइबर अपराधियों के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल फोन से साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

साइबर क्राइम थाना पुलिस का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले गिरोह लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए या पैसे की मांग करे तो उसकी बातों में न आएं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर पुलिस की इस कार्रवाई को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। साथ ही पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि किसी भी लालच या कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें, अन्यथा वे भी साइबर अपराध की जांच के दायरे में आ सकते हैं।।