लखनऊ :
विदेश में बुझ गया मोहनलालगंज के एक घर का चिराग: कुवैत में युवक की संदिग्ध अवस्था में हुआ इंतकाल,चार माह पहले हुई थी शादी।
दो टूक : मृतक की पत्नी ने केन्द्र सरकार से गुहार लगाई है की पति का शव अन्तिम दर्शन के लिये विदेश से भारत मंगाये।
राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के भदेसुवा गांव का एक घर इन दिनों मातम में डूबा हुआ है। जिस आंगन में कुछ महीने पहले शहनाइयां गूंजी थीं, आज वहीं चीख-पुकार और आंसुओं की आवाज सुनाई दे रही है। गांव के युवक इश्तियाक (28 वर्ष) की 13 अप्रैल को कुवैत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद से पत्नी समेत परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।पत्नी आफरीन बानो की आंखें अपने हमसफर के अंतिम दर्शन के इंतजार में सूख चुकी हैं। वह बार-बार एक ही बात दोहरा रही है—“बस एक बार मेरे पति को घर ले आइए, मैं उन्हें आखिरी बार देखना चाहती हूं।”
मृतक के पिता मुश्ताक अली ने बताया कि उनका बेटा इश्तियाक वर्ष 2017 से कुवैत में रहकर सहारा कंपनी में एसी मैकेनिक का काम कर रहा था। बेटे की जिंदगी पटरी पर थी, इसी बीच 24 नवंबर 2025 को उसका निकाह आफरीन बानो से बड़े ही धूमधाम से हुआ था। परिवार ने सपने सजाए थे कि अब खुशियों का दौर शुरू होगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।निकाह के बाद जनवरी 2026 में इश्तियाक दोबारा कुवैत चला गया। 13 अप्रैल को दोपहर करीब 3 बजे पत्नी से उसकी आखिरी बार बात हुई थी। उसने बताया था कि ड्यूटी खत्म कर कमरे पर पहुंच गया है। लेकिन रात करीब 10 बजे एक अनजान युवक ने उसके फोन से कॉल कर बताया कि इश्तियाक की मौत हो गई है और उसका शव बाथरूम में मिला है।यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी आफरीन बेसुध हो गईं, मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है।परिजन लगातार कंपनी से संपर्क कर शव भारत भेजने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। मजबूर होकर पिता मुश्ताक अली ने भारत सरकार व विदेश मंत्रालय और लखनऊ जिला प्रशासन से बेटे का शव भारत मंगवाने की अपील की है।
पत्नी की करुण पुकार पति का शव भारत मंगाये सरकार..
चार महीने पहले आफरीन बानो ने जिसके साथ जिंदगी बिताने का सपना देखा था और निकाह किया था आज उनके बिना जीना पड़ रहा है…पत्नी आफरीन ने सरकार से विनती है कि मेरे पति का शव घर आ जाए, ताकि मैं आखिरी बार उन्हें देख सकूं।पत्नी समेत परिवार ने भारत सरकार समेत विदेशमंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कुवैत से इश्तियाक का शव भारत मंगवाया जाए, ताकि परिवार उसे अंतिम विदाई दे सके।
भदेसुवा गांव की इस घटना ने हर आंख को नम कर दिया है। एक पत्नी अपने पति के अंतिम दर्शन के लिए तरस रही है, एक पिता अपने बेटे को आखिरी बार घर लाने की आस लगाए बैठा है… अब सबकी नजरें सरकार की ओर टिकी हैं।
