सोमवार, 20 अप्रैल 2026

गौतमबुद्धनगर: सोरखा डूब क्षेत्र कांड: नाबालिग से दुष्कर्म पर फूटा जनाक्रोश, नोएडा सिटीजन फोरम ने पीड़ित परिवार को दिया हरसंभव मदद का भरोसा!!

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गौतमबुद्धनगर: सोरखा डूब क्षेत्र कांड: नाबालिग से दुष्कर्म पर फूटा जनाक्रोश, नोएडा सिटीजन फोरम ने पीड़ित परिवार को दिया हरसंभव मदद का भरोसा!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

नोएडा, 19 अप्रैल 2026।
दो टूक/ नोएडा, सोरखा डूब क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध को लेकर जहां आमजन में आक्रोश है, वहीं सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में नोएडा सिटीजन फोरम (एनसीएफ) ने घटना पर गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है।

फोरम की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि इस कठिन समय में फोरम पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा है और न्याय दिलाने की हर संभव कोशिश करेगा।

शालिनी सिंह ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मामले में संवेदनशील और प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत एक अनुभवी महिला वकील की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि पीड़िता को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इस संबंध में सभी जरूरी सावधानियां बरती जाएंगी।

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, त्वरित और कठोर जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और समाज में एक सशक्त संदेश जाए। फोरम ने यह भी जोर दिया कि पीड़िता की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ बाल मनोचिकित्सक द्वारा तत्काल काउंसलिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए।

इसके साथ ही फोरम ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए नोएडा पुलिस से ठोस और प्रभावशाली नीति बनाने की मांग उठाई है। शालिनी सिंह ने कहा कि रेप जैसे जघन्य अपराधों में संबंधित थाना क्षेत्र के थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, वहां के थाना प्रभारी को तत्काल हटाया जाए और उन्हें कम से कम पांच वर्षों तक किसी भी नागरिक क्षेत्र का प्रभार न दिया जाए।

फोरम ने समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दें तथा पीड़ित परिवार का सहयोग करें, ताकि उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में सामूहिक प्रयास मजबूत हो सकें।

यह घटना एक बार फिर समाज और प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक मासूम बच्चियां ऐसे अपराधों का शिकार होती रहेंगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।