बुधवार, 29 अप्रैल 2026

गौतमबुद्धनगर: सेक्टर-91 में बन रहा 30 एकड़ का डियर पार्क, अक्टूबर 2026 तक होगा तैयार — नोएडा में जैव विविधता को मिलेगा बड़ा सहारा!!

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गौतमबुद्धनगर: सेक्टर-91 में बन रहा 30 एकड़ का डियर पार्क, अक्टूबर 2026 तक होगा तैयार — नोएडा में जैव विविधता को मिलेगा बड़ा सहारा!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-91 में लगभग 30 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किए जा रहे डियर पार्क (हिरण पार्क) का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा 29 अप्रैल 2026 को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की गई।

बैठक में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (वीटी), वरिष्ठ अधिकारीगण एवं वन्यजीव विशेषज्ञ श्री प्रवीण चंद्र त्यागी (आईएफएस, सेवानिवृत्त) सहित परियोजना से जुड़े तमाम अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान पार्क के एंट्री प्लाज़ा के डिज़ाइन, हिरणों व अन्य वन्य जीवों के लिए बनाए जा रहे एनक्लोज़र तथा निर्माण कार्यों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पार्क में आने वाले आगंतुकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके तहत बैटरी संचालित वाहन (गोल्फ कार्ट), ईवी चार्जिंग स्टेशन, स्वच्छ टॉयलेट, धूप से बचाव के लिए शेड (हट) और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करते हुए अक्टूबर 2026 तक पार्क का उद्घाटन कराने के निर्देश भी दिए गए।

गौरतलब है कि गौतमबुद्धनगर और पूरे एनसीआर क्षेत्र में फिलहाल कोई समर्पित डियर पार्क मौजूद नहीं है। ऐसे में यह परियोजना न केवल क्षेत्र की पहली पहल होगी, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी से घटती हिरणों की संख्या को देखते हुए इस तरह के संरक्षित आवास अत्यंत आवश्यक हैं।

यह डियर पार्क वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ आम नागरिकों को पर्यावरण शिक्षा और प्राकृतिक मनोरंजन का अवसर भी प्रदान करेगा। हिरणों की मौजूदगी से पार्क के भीतर पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूती मिलेगी, जिससे समग्र पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इस डियर पार्क (मिनी चिड़ियाघर) को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है। नोएडा में यह परियोजना शहर की हरित छवि को और सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।।