गौतमबुद्धनगर: नोएडा के 50वें स्थापना दिवस पर किसानों का सवाल—“विकास तो हुआ, लेकिन हक़ कब मिलेगा?” : अशोक भाटी
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
याकूबपुर (नोएडा), 15 अप्रैल।
दो टूक//नोएडा अपने 50वें स्थापना दिवस की तैयारियों में जुटा है, लेकिन दूसरी ओर क्षेत्र के किसानों में अब भी अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर असंतोष साफ नजर आ रहा है। इसी क्रम में ग्राम याकूबपुर में भारतीय किसान यूनियन द्वारा एक महत्वपूर्ण किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम का आयोजन महेश खटाना द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता चौधरी बिरे पिलवान ने की, जबकि संचालन गौतम बुद्ध नगर के जिलाध्यक्ष अशोक भाटी ने किया। संगोष्ठी में ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी लंबे समय से लंबित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
किसानों की प्रमुख समस्याएं उठीं
संगोष्ठी में ग्रामीणों ने आबादी निस्तारण, गांवों में खेल मैदान की कमी, चिकित्सा केंद्रों की अनुपलब्धता, प्राधिकरण से जुड़ी जटिलताएं, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी, 5% आवासीय भूखंड, आयुष्मान कार्ड, विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं पर गंभीर चिंता जताई।
ग्रामीणों का कहना था कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन गांवों की जमीनी हकीकत अब भी पिछड़ी हुई है।
“50 साल में भी किसानों को नहीं मिला हक” : अशोक भाटी
अपने संबोधन में जिलाध्यक्ष अशोक भाटी ने तीखे शब्दों में कहा कि नोएडा 17 अप्रैल को अपना 50वां स्थापना दिवस मना रहा है, लेकिन यह शहर जिन किसानों की जमीन पर बसा है, वे आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 से शुरू हुआ किसानों का संघर्ष आज भी जारी है और उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
भाटी ने स्पष्ट कहा कि विकास का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचा है और वे अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने याकूबपुर से 2019 में शुरू हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि यह लड़ाई आज भी जारी है और जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक किसान पीछे नहीं हटेंगे।
युवाओं के रोजगार पर विशेष जोर
संगोष्ठी में जिला सचिव सचिन अवाना ने युवाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवा पढ़-लिखकर भी रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सचिन अवाना ने सरकार और प्राधिकरण से मांग की कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए और औद्योगिक इकाइयों में उन्हें उचित अवसर दिए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते युवाओं को रोजगार नहीं मिला, तो यह एक बड़ा सामाजिक संकट बन सकता है। उनके इस वक्तव्य को युवाओं और ग्रामीणों ने जोरदार समर्थन दिया।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सुभाष चौधरी ने तीनों प्राधिकरणों के खिलाफ जल्द ही बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल के बाद किसानों के अधिकारों को लेकर एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें जिले भर के किसान भाग लेंगे।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस अवसर पर सुभाष भाटी, सुधीर भाटी, रविंद्र भगत, विपिन तंवर, सुंदर बाबा, दीपक भाटी, प्रवीन बाबा, जोगिंदर भड़ाना, धीरेस नंबरदार, राकेश लोहिया, संदीप अवाना, सचिन अवाना, अमित अवाना, प्रमोद टाइगर, उमेश भाटी, कर्मवीर भाटी, खुशीराम भाटी, सत्ते भाटी, नीरज गुर्जर, कमल खटाना, विजय खटाना, जयकरण खटाना, संचित चौहान, ओमवीर खारी, राजवीर सरपंच, अनिल खारी, सुमित कपासिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
नोएडा जहां अपने 50 वर्षों की विकास यात्रा का जश्न मनाने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान अब भी अपने अधिकारों और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्षरत हैं। याकूबपुर की यह संगोष्ठी साफ संकेत देती है कि आने वाले दिनों में किसान आंदोलन और तेज हो सकता है।
