गौतमबुद्धनगर: 17 अस्पतालों में फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल, 2100 लोगों को दिया गया प्रशिक्षण — सेक्टर-12 में वृहद अभ्यास आयोजित!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
गौतमबुद्धनगर, 21 अप्रैल 2026
दो टूक// पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर द्वारा अग्नि सुरक्षा को लेकर एक व्यापक अभियान चलाते हुए जनपद के 17 अस्पतालों में निकासी (Evacuation) एवं मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देशन एवं मुख्य अग्निशमन अधिकारी के नेतृत्व में अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग द्वारा “अग्निशमन सेवा सप्ताह” के अंतर्गत संचालित किया गया।
इस दौरान लगभग 2100 से अधिक लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिन्हें आग लगने जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए।
इसी क्रम में मंगलवार को सेक्टर-12 स्थित एक अस्पताल में फायर टेंडर एवं हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से वृहद मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस विशेष अभ्यास में 600 से अधिक अस्पताल कर्मियों को लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी और राहत-बचाव के तरीकों की जानकारी दी गई।
ड्रिल के दौरान अग्निशमन विभाग के प्रशिक्षित कर्मियों ने प्रतिभागियों को प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों जैसे फायर एक्सटिंग्विशर, फायर हाइड्रेंट, होज़ रील और फायर बकेट के सही उपयोग का प्रशिक्षण दिया। साथ ही आग लगने की स्थिति में अपनाए जाने वाले जरूरी सुरक्षा उपायों को भी विस्तार से समझाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि आपात स्थिति में घबराने की बजाय शांत रहकर तुरंत 101 या 112 पर सूचना देना, धुएं में झुककर बाहर निकलना, और निकटतम सीढ़ियों का उपयोग करना बेहद आवश्यक है। वहीं, लिफ्ट का प्रयोग न करना, सामान लेने वापस न जाना और भीड़भाड़ से बचना जैसे निर्देश भी दिए गए।
मॉक ड्रिल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि अस्पतालों का स्टाफ न केवल सैद्धांतिक बल्कि व्यावहारिक रूप से भी आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम हो सके।
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने स्पष्ट किया कि आमजन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस प्रकार के जागरूकता अभियान आगे भी निरंतर चलाए जाते रहेंगे, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जनहानि को न्यूनतम किया जा सके और त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित हो सके।।
