सिद्धेश्वर पाण्डेय
दो टूक ,आजमगढ़ । पवई ब्लॉक के ग्राम मकसुदिया में वित्तीय वर्ष 2021-2025 के दौरान कराए गए विकास कार्यों में करोड़ों रुपये की अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्राम निवासी श्रीमती राधिका चौहान द्वारा इस मामले की शिकायत किए जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं । जिससे मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंचने की स्थिति में आ गया है।
श्रीमती राधिका चौहान ने 12 अगस्त 2025 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की जांच की मांग की थी। इस पर जिलाधिकारी ने 25 अगस्त 2025 को जिला उद्यान अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया। आरोप है कि 24 सितंबर 2025 को की गई जांच अधूरी रही और करीब 90 दिन बाद 18 नवंबर 2025 को रिपोर्ट डीपीआरओ को सौंपी गई।
इसके बाद जिलाधिकारी ने 2 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1)(छ) के तहत ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा। जवाब न मिलने पर 29 जनवरी 2026 को प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज करते हुए पीडी मनरेगा को अंतिम जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
आरोप है कि पीडी मनरेगा द्वारा 15 बिंदुओं की विस्तृत जांच किए बिना ही 23 फरवरी 2026 को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई, जिसमें सभी आरोपों को निराधार बताते हुए मामला समाप्त कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच फर्जी और एकतरफा की गई है।
श्रीमती चौहान ने 27 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी एवं आयुक्त के समक्ष पुनः आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि राव सिंह पोखरी का निर्माण जेसीबी से कराकर 1लाख 511 रुपये का फर्जी भुगतान किया गया, जबकि सुदामा देवी के सरसों के खेत को पोखरी दिखाकर 1लाख 65 हजार 140 का भुगतान किया गया है।
शिकायत के बाद मुख्यमंत्री एवं आयुक्त स्तर से कई बार 15 बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को निर्देश दिया गया कि शिकायतकर्ता की उपस्थिति में पुलिस बल के साथ जांच कर 15 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। बावजूद इसके अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है।
लगातार अनदेखी से नाराज शिकायतकर्ता राधिका चौहान ने अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। मामले ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
