गौतमबुद्धनगर: मनमानी पर लगेगी लगाम: गौतमबुद्ध नगर के निजी स्कूलों पर सख्ती, 7.11% से ज्यादा फीस बढ़ोतरी पर कार्रवाई तय!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक// ग्रेटर नोएडा।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। अब जिले के कोई भी निजी विद्यालय नियमों के विरुद्ध फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई स्कूल निर्धारित मानकों का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता रद्द करने से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों कार्रवाई एक साथ की जा सकती हैं।
जिले में संचालित करीब 2500 निजी स्कूलों में हर साल फीस वृद्धि, कॉपी-किताबों और परिवहन शुल्क के नाम पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने सभी स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और अभिभावकों पर किसी भी प्रकार का आर्थिक दबाव न डालें।
प्रवेश के समय ही बतानी होगी पूरी फीस संरचना
अब सभी स्कूलों को यह अनिवार्य किया गया है कि वे प्रवेश के समय ही अभिभावकों को पूरी फीस संरचना की स्पष्ट जानकारी दें। शुल्क को अलग-अलग मदों में विभाजित कर पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत करना होगा, ताकि अभिभावकों को किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।
एक बार ही लिया जाएगा पंजीकरण व विवरण शुल्क
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विवरण पुस्तिका और पंजीकरण शुल्क केवल एक बार ही लिया जाएगा। प्रवेश शुल्क केवल नए छात्रों से लिया जा सकेगा, जबकि परीक्षा शुल्क केवल परीक्षा के समय ही लागू होगा। इसके अतिरिक्त परिवहन, बोर्डिंग, मेस, शैक्षणिक भ्रमण और अन्य गतिविधियों से जुड़े शुल्क वार्षिक रूप से तय किए जाएंगे और उनमें मनमानी बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।
7.11% तक ही बढ़ेगी फीस
उत्तर प्रदेश शुल्क नियामक अधिनियम-2018 के तहत फीस वृद्धि का आधार तय किया गया है। इसके अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) या शिक्षकों के वेतन वृद्धि में जो कम होगा, उसमें 5 प्रतिशत जोड़कर ही फीस बढ़ाई जा सकती है। इस वर्ष CPI 2.11% दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर अधिकतम 7.11% तक ही फीस वृद्धि की अनुमति होगी।
अभिभावकों को मिलेगी राहत, स्कूलों पर बढ़ी जवाबदेही
शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, निजी स्कूलों की जवाबदेही भी तय होगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन कायम हो सकेगा।
