रविवार, 15 फ़रवरी 2026

लखनऊ : STF ने फर्जी लोन गिरोह के मास्टर माइंड को लग्जरी गाडियों के संग किया गिरफ्तार।||Lucknow: STF arrested the mastermind of a fake loan racket along with luxury cars.||

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लखनऊ : 
STF ने फर्जी लोन गिरोह के मास्टर माइंड को लग्जरी गाडियों के संग किया गिरफ्तार।
कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर मुद्रा लोन योजना में फ्राड का मामला।
दो टूक : USTF ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैंक कर्मियों की मदद से 100 से अधिक लोगों,कम्पनियो, फर्मों के नाम पर करोडों रूपये का मुद्रा लोन लेकर फाड करने वाले गिरोह के मास्टर माइंड आमिर अहसन को लग्जरी गाडियों के साथ गिरफ्तार कर लिया।
विस्तार :
एसटीएफ अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह के अनुसार एसटीएफ मुख्यालय, लखनऊ को प्रार्थना पत्र देते हुए पीडित ने बताया कि व्यवसाय हेतु कुछ रूपयों की आवश्यकता थी जिसके लिए उसने अपने मित्र इंद्रजीत सिंह से बात किया था। इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उसका मित्र नावेद हसन, विभिन्न बैंको के मैनेजरों से परिचित है और वह लोन दिलवाने का काम करता है। इंद्रजीत के कहने पा शिकायतकर्ता राज बहादुर गुरुंग ने अपने दस्तावेज उसे दिये। लगभग 15 दिन बाद इंद्रजीत सिंह राजबहादुर गुरंग को यूनियन बैंक आफ इंडिया शाखा जानकीपुरम मैनेजर गौरव सिंह के केबिन में ले गया। वहां पहले से एक फाइल रखी हुई थी जिसमें अंग्रेजी में टाइप किये हुए कई कागजात पूर्व से रखे थे। उन लोगों ने राज बहादुर गुरुंग को अपने प्रभाव में लेकर उन कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिया था। अगले दिन फिर इंद्रजीत ने बताया कि कुछ और सिग्नेचर बाकी है, जिसके लिए वह राज बहादुर गुरुंग को दोबारा बैंक ले गया। इस बार गौरव सिंह व नावेद हसन दोनो मिले और लगभग 15-20 जगह फिर से साइन करवाए गए। और कहा कि तुम्हारा काम जल्द ही हो जाएगा पर कुछ दिन बाद राज बहादुर गुरुंग ने पूछा तो नावेद ने मना कर दिया कि तम्हारा लोन नही हुआ। लगभग 5-6 महीने बाद राज बहादुर गुरुंग के मोबाइल पर ईएमआई ड्यू का मैसेज आया। तब राज बहादुर गुरुंग ने अपना सिविल स्कोर निकलवाया तो पता चला कि उसके नाम से दो लोन स्वीकृत हुए है।
उपरोक्त प्रकरण पर तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर दिनांक 13-09-2025 को एसटीएफ उ०प्र० द्वारा यूनियन बैंक आफ इंडिया के ब्रांच मैनेजर गौरव सहित चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर थाना साइबर क्राईम, लखनऊ में अभियोग पंजीकृत कराया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों से की गयी पूछतांछ व बरामद दस्तावेजों के विश्लेशण से ज्ञात हुआ कि गिरोह को नावेद के साथ मिलकर संचालित करने वाला
मास्टरमाइंड आमिर एहसन है। जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे थे। उसी के कम में दिनांक 15-02-2026 को आमिर अहसन निवासी मोहम्दाबाद गोहन मऊ को एसटीएफ व साइबर काइम पुलिस स्टेशन लखनऊ की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए आईआईएम रोड निकट सहारा होम्स थाना क्षेत्र मड़ियांव जनपद लखनऊ से समय 11:40 बजे गिरफ्तार किया गया, जिससे उपरोक्त बरामदगी हुई।
गिरफ्तार मास्टर माइंड आमिर अहसन ने बताया कि वह 2017 में यूनिटी कॉलेज हुसैनाबाद से ड्राफ्टमैन से डिप्लोमा किया। एक रिश्तेदार के माध्यम से 2018 में मेरी मुलाकात नावेद से हुई। नावेद के ऊपर 2017 में बैंक फ्रॉड करने के कारण एसबीआई बैंक के ब्रांच मैनेजर द्वारा एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। जिसमें नावेद के अतिरिक्त तकी अब्बास, अवनीत कौर, कल्बे रजा आब्दी, जैन रिजवी, व तारिक के नाम प्रकाश में आये थे। इसी के संबंध में मेरी बात नावेद से होना शुरू हुई। कुछदिन पश्चात हम लोगों ने रूपये कमाने के लिए फर्जी तरीके से लोन कराने का प्लान बनाया। जिसमें लोगों के आधार व पैनकार्ड पर लगे फोटो को एडिट कर उनके नाम पर किसी दूसरे को ले जाकर बैंक कर्मियों की मिली भगत से मुद्रा लोन योजना के अन्तर्गत अलग अलग बैंको से लोन निकालने का प्लान था। इसके बाद वर्ष 2019 में मैंने मेरे जानने वाले विजय शुक्ला व शुभम मिश्रा मोबाइल से नावेद की मुलाकात कराई। शुभम मिश्रा ने नावेद को पंजाब एंड सिंध बैंक विरहना के मैनेजर से मिलवाया इसके बाद हम लोगो द्वारा दूसरे के आधर व पैन पर गिरोह के सदस्यों के फोटो लगाकर फर्जी पते पर बनायी गयी कंपनी की कोटेशन बनाकर लोन करने का कार्य शुरू किया गया। हमलोगों द्वारा जनरेटर का लोन दस लाख रूपये नेशन क्रिएशन कम्पनी जो नावेद ने फर्जी आईडी पर बनायी थी में लिया गया। इसमें अर्शद खान के नाम पर लिया गया जिसमें नावेद की फोटो लगायी गयी थी व हस्ताक्षर भी नावेद ने किया था। शुभम मिश्रा को 10 प्रतिशत कमीशन दिया गया। इसके बाद हम लोग डायरेक्ट लोन कराने लगे। हम लोगों द्वारा विभिन्न बैंको के मैनेजर से साठगांठ कर, फर्जी दस्तावेजों माध्यम से व फर्जी पते पर बनायी गयी कम्पनियों से कोटेशन देते थे। इसके बाद दूसरे व्यक्तियों के दस्तावेजों पर लगी फोटो को एडिट कर उनकी फोटो की जगह अपने गिरोह के सदस्यों की फोटो लगाकर व उनके नाम से हस्ताक्षर कर मुद्रा लोन लेकर फाड किया जाने लगा। हम लोगों द्वारा अब तक लगभग 100 से अधिक लोगों , फर्मों,कम्पनियों के नाम से लोन विभिन्न बैंकों से फर्जी तरीके से कराये गये हैं अब तक की जाँच,अभिसूचना संकलन से प्रकाश में आये तथ्यों के आधार पर पता चला है कि इस गिरोह द्वारा फर्जी तरीके से कराये गये लोनों से करोड़ों रूपयों अर्जित किये गये हैं। जिसके सम्बन्ध में जांच की जा रही है। अभियुक्तों द्वारा बताये गये बैंक खाते, वालेट की जानकारी ,परीक्षण व गिरोह के अन्य सदस्यो की गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं। अभियुक्तों से बरामद इलेक्ट्रानिक उपकरणों का फारेंसिक परीक्षण कराया जायेगा।
उपरोक्त गिरफ्तार अभियुक्त को थाना साइबर क्राईम, लखनऊ में मु०अ०सं० 139/2025 धारा-34/419/420/465/467/468/471/ भा०द०वि० व 66सी, 66डी आईटी एक्ट में दाखिल किया गया है। आव यक विधिक कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।