बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

लखनऊ : कांग्रेस ने विधानसभा में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर उठाए सवाल।||Lucknow: Congress raised questions in the Assembly about the declining quality of education.||

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लखनऊ : 
कांग्रेस ने विधानसभा में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर उठाए सवाल।
दो टूक : नेता विधानमंडल दल कांग्रेस आराधना मिश्रा मोना ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में उठाया और भाजपा की तानाशाही रवैया बताया। डिजिटल इंडिया का नारा देने वाले भाजपा सरकार डिजिटल शिक्षा में फेल हो गई है।
विस्तार : 
नेता विधानमंडल दल कांग्रेस आराधना मिश्रा मोना ने आज बजट पर विधानसभा में बोलते हुए शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया, मनरेगा को लेकर प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज के मुद्दे को विधानसभा में उठाया , और योगी आदित्यनाथ सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक कहा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, योगी आदित्यनाथ सरकार में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सरकार को असफल बताया, आराधना मिश्रा मोना ने निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में बढ़ती फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के ऊपर बढ़ रहे आर्थिक भार को लेकर सरकार की तरफ से गरीब छात्रों को बजट में कोई सहायता न देने पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा।

कांग्रेस विधान मंडल दल नेता आराधना मिश्रा मोना ने आज विधानसभा कार्यवाही में नियम 56 के अंतर्गत प्रदेश के जन-जन से जुड़े लोकमहत्व के विषय शिक्षा और उसकी गिरती गुणवत्ता का मुद्दा उठाया , सदन में चर्चा के दौरान श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने कहा की सरकार डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट स्कूल और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी-बड़ी बात करती है लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है जो बातें की जा रही है क्या उस हिसाब से हमारे प्रदेश के बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा मिल रही है ? क्या भाजपा सरकार शिक्षा की गुणवता बढ़ाने को लेकर गंभीर है ? सरकार कुछ भी कहे लेकिन शिक्षा क्षेत्र के जो आंकड़े हैं और जो रिपोर्ट है तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और योगी आदित्यनाथ सरकार के दावों की पोल खोलती है ।

श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मनरेगा बचाओ महासंग्राम के प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए कहा कि मनरेगा जो ग्रामीण क्षेत्र के आम आदमी के रोजगार से जुड़ी जीवन रेखा है, जिसे भाजपा ने खत्म करने करके आम आदमी के रोजगार पर हमला किया है, उसके खिलाफ कांग्रेस कांग्रेस कार्यकर्ता शांतिपूर्वक लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, जिसका संविधान भी हमें अधिकार देता है,लेकिन योगी सरकार द्वारा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने की, डराने की, गिरफ्तारी की गई,कार्यकर्ता अपना प्रदर्शन शांतिपूर्वक कर रहे थे, उसके बाद भी सरकार ने लाठीचार्ज किया गया और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहे, क्या लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का हमारा अधिकार नहीं ? ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए ।

आराधना मिश्रा मोना ने कहा किसी भी क्षेत्र में काम करने के लिए सत्ता में बैठी सरकार की नियत ईमानदार होना बहुत जरूरी है, और उसके लिए जो बजट होता है उसी से सरकार की नियत का पता चलता है, अगर बजट की बात करें जिस बजट की संख्या को इतना बड़ा बनाकर पेश किया है, यदि इतने भारी भरकम बजट में शिक्षा पर सरकार कितना बजट खर्च कर रही है ? शिक्षा पर उत्तर प्रदेश देश में सबसे नीचे से दूसरे स्थान पर है है बजट आवंटन में, मतलब उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है जहां पर शिक्षा को लेकर भाजपा सरकार कोई प्राथमिकता नहीं दे रही है, जबकि हमसे बेहतर तो हमारे पड़ोसी जो राज्य हैं चाहे दिल्ली हो बिहार हो जो अपने बजट का 20% से अधिक शिक्षा के लिए आवंटित करते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में यह बजट मात्र 12% ही प्रस्तावित है, 25 करोड़ से ज्यादा की आबादी के राज्य में 12% बजट तो कैसे शिक्षा की गुणवत्ता बनेगी और सुधरेगी ?

आराधना मिश्रा मोना ने कहा जो एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन रिपोर्ट है (ASER ) 2024, उसको देखें तो प्रदेश में सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 के लगभग 50% बच्चे कक्षा 2 के स्तर का हिंदी पाठ पढ़ने में संघर्ष करते हैं, मतलब भले वह कक्षा 5 में लेकिन यदि उनकी गुणवत्ता जांची जाए तो वह कक्षा 2 के स्तर पर ही पहुंच पाते हैं,तो ऐसे में शैक्षिक गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है, ASER रिपोर्ट कहती है कि कक्षा 8 के 45 प्रतिशत छात्र भाग नहीं कर पाते , 23 प्रतिशत विद्यार्थी घटाने जैसी गणित नहीं कर पाते हैं, और तो और इससे बुरी हालत सरकारी स्कूलों में यह है कि 26 प्रतिशत छात्र 11 से 99 के बीच की संख्या को पहचानने में असमर्थ हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने का दावा करने वाली बातें हवाई हैं, प्रदेश के होनहार युवा जिनको उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देकर देश को & प्रदेश को मजबूत कर सकते थे, यही युवा विश्व में भारत का नाम ऊंचा कर सकते थे, भाजपा योगी आदित्यनाथ सरकार गुणवत्ता परक शिक्षा न देकर बहुत गलत और युवाओं के साथ धोखा दे रही है ।

आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि जब बच्चे गणित - विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय की बुनियादी जानकारी से वंचित हैं, तो आगे कैसे बढ़ेंगे, सच्चाई यह है कि 2016 के बाद से जूनियर हाई स्कूल उच्च प्राथमिक में गणित और विज्ञान शिक्षकों की कोई नई भर्ती ही नहीं हुई रोजगार के बड़े बड़े दावे करने वाली बीजेपी सरकार 69000 सीधी शिक्षक भर्ती में जो शेष पद रह गये उन्हें 8 साल में भी नही भर पायी ।

    आराधना मिश्रा मोना ने कहा प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं प्रत्येक साल 4:30 लाख से बी.एड. और डी.एल.एड. अभ्यर्थी पास हो रहे हैं,और 7 साल में 30000 शिक्षक रिटायर भी हो गए, लेकिन इस दौरान कोई नई सीधी भर्ती नहीं हुई । तदर्थ शिक्षकों का भर्ती मुद्दा सालों से आज भी लंबित है ।

आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि सरकार खुद मानती है कि शिक्षकों की कमी है बेसिक शिक्षा मंत्री ने खुद सदन में बताया है कि बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के 46944 पद खाली हैं,और योगी सरकार यह भी तर्क दे रही है कि विद्यालयों में पठन- पाठन कार्य के लिए पर्याप्त शिक्षक और शिक्षामित्र संख्या मौजूद है, यह दोनों बातें एक साथ कैसे हो सकती हैं ?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जो जारी की गई रिपोर्ट है इसके अनुसार यूपी के 9508 सरकारी स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है, इन स्कूलों में 6 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं, अब ऐसे में क्या एक शिक्षक पूरे स्कूल के सभी कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ा पाएगा, इसके अलावा तमाम और काम भी शिक्षक से शिक्षण कार्य के अलावा कराए जाते हैं, जनगणना ,मतदान सर्वे और अन्य , SIR भी शिक्षक कर रहे हैं ।

आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने को लेकर बिल्कुल नहीं दिखती, योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में 11000 स्कूलों को मर्ज करके अन्य स्कूलों और शिक्षकों का बोझ बढ़ाया जा रहा है, यूपी में 6 साल में 36000 सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद/मर्ज हो गए, स्कूल कम हो रहे हैं,शिक्षक कम हो रहे हैं, प्रदेश की जनसंख्या बढ़ रही, विद्यार्थी बढ़ रहे हैं तो ऐसे में कैसे मजबूत होगी शिक्षा ? डिजिटल एजुकेशन को लेकर श्रीमती आराधना मिश्रा ने सरकार पर निशाना साधा कि प्रदेश में 1 लाख 37000 से अधिक सरकारी स्कूल, 8000 से अधिक सहायता प्राप्त स्कूल, और लगभग 1 लाख 4000 निजी अनुदान रहित स्कूल हैं जिनमें केवल ₹51 295 स्कूलों में ही सिर्फ कार्यशील कंप्यूटर हैं,और केवल 37498 स्कूलों में लैपटॉप हैं, और 69000 स्कूलों में सिर्फ टैबलेट, आंकड़ों से स्पष्ट है कि आज भी लगभग 79% स्कूल डिजिटल शिक्षा से दूर हैं ।
 आराधना मिश्रा मोना में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर सरकार के दावों की पोल खोलते हुए कहा कि आप नई शिक्षा नीति ला रहे हैं, स्मार्ट स्कूल की बात कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, लेकिन आपकी नियत ईमानदार नहीं है, बच्चे जो भविष्य की नर्सरी हैं, उन्हें शिक्षकों की कमी में, स्कूल बंद करके कैसे गुणवत्ता परक शिक्षा मिलेगी।