मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: फ्लावर शो या ‘फंड शो’? नोएडा प्राधिकरण की पुष्प प्रदर्शनी पर करोड़ों की वसूली के आरोप!!

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गौतमबुद्धनगर: फ्लावर शो या ‘फंड शो’? नोएडा प्राधिकरण की पुष्प प्रदर्शनी पर करोड़ों की वसूली के आरोप!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// नोएडा। शहर में आयोजित हुई भव्य पुष्प प्रदर्शनी अब विवादों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार नोएडा प्राधिकरण के हॉर्टिकल्चर विभाग पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि कार्यक्रम के लिए पहले से ही लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होने के बावजूद कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के नाम पर अलग से फंड जुटाया गया।

डिप्टी डायरेक्टर पर आरोप, करोड़ों की कैश वसूली की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक हॉर्टिकल्चर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अंकित सेंगर पर शहर की कई बैंक शाखाओं, कंपनियों और बिल्डर समूहों से मोटी रकम वसूलने के आरोप लगे हैं। खबर है कि एक पान मसाला कंपनी और एक बड़े बिल्डर ग्रुप से लगभग 70-70 लाख रुपये लिए गए। इसके अलावा करीब 10 बैंकों से 5-5 लाख रुपये की राशि जुटाने का भी दावा किया जा रहा है।

यह भी आरोप है कि कुछ जगहों पर रकम कैश में ली गई और कई भुगतान सीधे ठेकेदारों के खातों में डलवाए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बजट तय था, फिर CSR फंड क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्राधिकरण ने पहले ही डेढ़ करोड़ रुपये का बजट तय कर दिया था, तो फिर CSR के नाम पर अतिरिक्त फंड जुटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  • क्या CSR फंड लेने और खर्च करने की प्रक्रिया प्राधिकरण बोर्ड से अनुमोदित थी?
  • CSR राशि के लिए अलग बैंक खाता क्यों नहीं खोला गया?
  • नियमों की अनदेखी कर फंड जुटाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

इन सवालों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

विधायक का पत्र भी चर्चा में

इस पूरे प्रकरण में स्थानीय विधायक तेजपाल नागर द्वारा नंद गोपाल नंदी को तैनाती को लेकर पत्र लिखे जाने की भी चर्चा है। आरोप है कि उक्त पत्र को नजरअंदाज करते हुए संबंधित अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई।

जांच की मांग तेज

मामले के सामने आने के बाद शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह होगा, बल्कि सार्वजनिक धन और CSR प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर आघात माना जाएगा।

फिलहाल प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जवाब आता है तो खबर को अपडेट किया जाएगा।।