गौतमबुद्धनगर: फ्लावर शो के बाद शर्मनाक मंजर: नोएडा के शिवालिक पार्क में पौधों की लूट, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल!!
दो टूक// नोएडा। शहर की पहचान बन चुके 38वें वसंत उत्सव के समापन के बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे शहर को शर्मसार कर दिया। सेक्टर-33ए स्थित शिवालिक पार्क में आयोजित भव्य फ्लावर शो के खत्म होते ही कुछ लोगों द्वारा गमलों से फूल-पौधे उखाड़ने और उन्हें अपने साथ ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
19 से 22 फरवरी तक आयोजित इस फ्लावर शो में रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक सजावट ने हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया था। खास तौर पर फूलों से तैयार किया गया केदारनाथ मंदिर का भव्य मॉडल कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। इसके अलावा करीब 120 किस्मों के दुर्लभ और सजावटी पौधों को प्रदर्शित किया गया था, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
कार्यक्रम के बाद बिगड़ी तस्वीर
चार दिनों तक चले इस उत्सव में जहां शहरवासियों ने प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया, वहीं समापन के तुरंत बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर पूरे आयोजन की गरिमा पर दाग लगा दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लोग गमलों से पौधे उखाड़कर ले जा रहे हैं। कई पौधे जमीन पर बिखरे नजर आए, जिससे आयोजन स्थल की सुंदरता पूरी तरह बिगड़ गई।
बताया जा रहा है कि इस घटना में करीब 120 किस्मों के पौधों को नुकसान पहुंचा है। कई महंगे और सजावटी पौधे भी उखाड़ लिए गए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इतने बड़े स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में समापन के बाद पर्याप्त निगरानी क्यों नहीं रखी गई? क्या आयोजकों और संबंधित प्राधिकरण द्वारा भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की साख पर असर पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। यूजर्स ने इसे सार्वजनिक संपत्ति का खुला अपमान बताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कई लोगों ने इसे “शहर की नागरिक चेतना पर सवाल” करार दिया है।
नागरिक जिम्मेदारी की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की पहचान केवल उसके आयोजनों से नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के व्यवहार से भी बनती है। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी, तो भविष्य में आयोजकों के सामने ऐसे कार्यक्रम कराने को लेकर चुनौती खड़ी हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित प्राधिकरण इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, यह घटना शहर के लिए एक सीख जरूर है कि विकास और सुंदरता के साथ-साथ नागरिक अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है।।
