रविवार, 1 फ़रवरी 2026

अम्बेडकरनगर :रिजेक्शन-अस्वीकृति नहीं, आत्मनिर्माण का शंखनाद।||Ambedkarnagar: Not rejection, but the sound of self-building.||

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अम्बेडकरनगर :
रिजेक्शन-अस्वीकृति नहीं, आत्मनिर्माण का शंखनाद।
स्वयं का निर्माण स्वयं से साक्षात्कार कराता है रिजेक्शन।।
।।डॉ सदानन्द गुप्ता।।
रिजेक्शन
यह शब्द सुनते ही मन के भीतर कहीं कुछ टूट-सा जाता है।
ऐसा लगता है जैसे हमारी तैयारी, हमारी आशा, हमारा विश्वास, हमारा संपूर्ण समर्पण—सब एक झटके में खारिज कर दिया गया हो।
रिजेक्शन केवल एक निर्णय नहीं होता, यह व्यक्ति की संवेदनाओं, स्वप्नों और आत्मसम्मान से टकराता हुआ एक तीखा अनुभव होता है।
जब कोई व्यक्ति पूरे मन, पूरे विश्वास, पूरी तैयारी और पूर्णता के भाव के साथ आगे बढ़ता है—चाहे वह परीक्षा हो, नौकरी हो, व्यवसाय हो, परिवार हो या समाज—और उसके हिस्से बार-बार रिजेक्शन आता है,
तो सामान्यतः समाज इसे असफलता कह देता है। लेकिन इतिहास इसे कुछ और ही नाम देता है।
इतिहास कहता है—
“जब रिजेक्शन बार-बार आता है, तब समझ लेना चाहिए कि स्वयं के निर्माण का समय आ गया है।”
रिजेक्शन का असली अर्थ रिजेक्शन का अर्थ यह नहीं होता कि आप अयोग्य हैं।
अक्सर इसका अर्थ यह होता है कि—
आपकी सोच अभी उस व्यवस्था से आगे है
आपकी क्षमता अभी उस ढाँचे में फिट नहीं बैठती या फिर आपको अभी अपने भीतर कुछ और तराशना है।
रिजेक्शन दरअसल एक दर्पण होता है
जो कहता है—“खुद को और बेहतर बनाओ, क्योंकि तुम्हारी मंज़िल साधारण नहीं है।”दुनिया की 20 महान हस्तियाँ जिन्हें बार-बार रिजेक्ट किया गया
अब्राहम लिंकन – चुनाव हारते-हारते राष्ट्रपति बने,थॉमस एडिसन – 1000 असफल प्रयोगों के बाद बल्ब
जे.के. रोलिंग – 12 प्रकाशकों ने ठुकराया
अल्बर्ट आइंस्टीन – “धीमा छात्र” कहा गया
स्टीव जॉब्स – अपनी ही कंपनी से निकाले गए,वॉल्ट डिज़्नी – “क्रिएटिव नहीं” कहकर निकाला गया,ओपरा विन्फ्रे – टीवी से रिजेक्ट,नेल्सन मंडेला – 27 साल जेल
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम – शुरुआती असफलताएँ,महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका में अपमान,रतन टाटा – शुरुआती व्यावसायिक आलोचना,माइकल जॉर्डन – स्कूल टीम से बाहर,विन्सेंट वैन गॉग – जीवन में एक भी पेंटिंग नहीं बिकी
लियोनार्डो दा विंची – “अधूरा कलाकार” कहा गया।बीथोवेन – बहरे होकर संगीत रचा,जेफ बेजोस – निवेशकों द्वारा अस्वीकृति,जैक मा – 30 नौकरियों में रिजेक्शन,चार्ली चैपलिन – “बहुत अजीब” कहकर नकारे गए,कल्पना चावला – अनेक असफलताएँ।
स्वामी विवेकानंद – प्रारंभिक उपेक्षा
इन सबको एक ही चीज़ जोड़ती है—
रिजेक्शन ने इन्हें तोड़ा नहीं, तराशा।
रिजेक्शन से सीखने की कला
रिजेक्शन से महान वही बनता है
जो रुकता नहीं,जो स्वयं की प्रवृत्ति में सुधार करता है,जो विचार, दृष्टि और विवेक में संशोधन करता है,और जो आत्मविश्लेषण से डरता नहीं।
रिजेक्शन कहता है—
“खुद से पूछो—मैं और बेहतर कैसे बन सकता हूँ?”हिमालय और सोच का रूपक
कहा जाता है—हिमालय पर चढ़ने से पहले व्यक्ति कई बार असफल होता है।
लेकिन जब उसका डिटरमिनेशन यह कह देता है—“हिमालय की ऊँचाई और नहीं बढ़ सकती,लेकिन मैं अपनी ऊँचाई बढ़ा सकता हूँ।”तभी शिखर झुकता है।शरीर में उतनी ताकत नहीं होती। जितनी सोच में होती है।
सोच से बड़ा कोई हथियार नहीं,और सोच से बड़ा कोई साहस नहीं।
20 सर्वश्रेष्ठ अंग्रेज़ी कोट्स (Rejection & Growth)
Rejection is redirection.
Every no brings you closer to a yes.
Failure is not opposite of success; it’s part of it.
Rejected today, respected tomorrow.
Pain is temporary, growth is permanent.
If you’re rejected, you’re being refined.
Don’t quit; transform.
Greatness requires resistance.
Rejection builds resilience.
The door closed because a better one is opening.
Champions are built by rejection.
Your value isn’t decided by others.
Rejection sharpens destiny.
No struggle, no strength.
Rise stronger after every fall.
Rejection teaches self-belief.
Destiny tests before rewarding.
Turn rejection into revolution.
Pain prepares you for power.
You are bigger than any rejection.
20 संक्षिप्त हिन्दी मोटिवेशनल कोट्स
रिजेक्शन अंत नहीं, संकेत है।
ठुकराया जाना, तराशे जाने की शुरुआत है।
जो रुका, वही हारा,अस्वीकृति आत्मनिर्माण का अवसर है। हर ठोकर दिशा देती है
हार में छिपी होती है तैयारी
रिजेक्शन साहस पैदा करता है
स्वयं को सुधारो, दुनिया बदल जाएगी
टूटो नहीं, ढल जाओ
नकारे गए लोग ही इतिहास बनाते हैं
असफलता प्रशिक्षण है
ठुकराया जाना नियति का इशारा है
साहस वहीं से शुरू होता है
हार स्वीकार नहीं, सीख स्वीकार करो
रिजेक्शन को रिजेक्ट करो
सोच बदलो, परिणाम बदलेंगे
ठोकरें रास्ता सिखाती हैं
दर्द विकास का मूल्य है
आत्मविश्वास ही असली पूँजी है
जो गिरकर उठा, वही महान बना
निष्कर्ष — रिजेक्शन को रिजेक्ट करने की क्षमता
राष्ट्र व्यक्ति की प्रतीक्षा करता है।
जब व्यक्ति स्वयं का निर्माण करता है,
तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होते हैं।
अंततः एक ही मंत्र है—
“असफलता को भी असफल करने का जुनून।”
यदि यह जुनून जीवित है,
तो कोई रिजेक्शन आपको रोक नहीं सकता।
रिजेक्शन केवल यह तय करता है
कि आप साधारण नहीं हैं।
लेखक :
डॉ सदानन्द गुप्ता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वाराणसी।