बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

लखनऊ: 2017 के बाद बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर: आध्यात्मिक पर्यटन से आर्थिक महाशक्ति की ओर बढ़ता प्रदेश!!

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लखनऊ: 2017 के बाद बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर: आध्यात्मिक पर्यटन से आर्थिक महाशक्ति की ओर बढ़ता प्रदेश!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

लखनऊ | 04 फरवरी, 2026

दो टूक// उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद पर्यटन क्षेत्र ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है। कभी केवल ताजमहल तक सीमित माने जाने वाले प्रदेश ने अब स्वयं को भारत की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित कर लिया है। राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार और सुनियोजित पर्यटन रणनीति के चलते उत्तर प्रदेश आज घरेलू पर्यटकों के मामले में देश का नंबर-1 राज्य बन चुका है। प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर रोजगार और आर्थिक विकास पर पड़ा है।

पर्यटन विकास की धुरी आध्यात्मिक सर्किट रहा है। अयोध्या धाम में श्रीराम मंदिर के निर्माण और भव्य दीपोत्सव आयोजन ने अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाई है। वर्ष 2017 से पहले जहां अयोध्या में पर्यटकों की संख्या लाखों में सिमटी रहती थी, वहीं अब यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच चुका है।
इसी प्रकार, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। गंगा आरती, अलकनंदा क्रूज जैसे जल पर्यटन प्रयोगों ने काशी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।

ब्रज क्षेत्र में ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के कुंडों व मंदिरों का व्यापक जीर्णोद्धार किया गया। इससे न केवल धार्मिक आस्था को बल मिला, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई।

पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने इसे उद्योग का दर्जा दिया। नई पर्यटन नीति-2022 के तहत होटल और रिसॉर्ट्स को औद्योगिक दरों पर बिजली-पानी की सुविधा दी गई, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। निवेश के इस माहौल ने प्रदेश में आधुनिक पर्यटन अधोसंरचना को गति दी है।

पर्यटकों की सुविधा के लिए कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया। कुशीनगर और जेवर (नोएडा) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के साथ-साथ अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास किया गया। इससे प्रदेश में क्रियाशील हवाई अड्डों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सड़क संपर्क के क्षेत्र में भी प्रदेश ने नया अध्याय लिखा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स ने प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच दूरी और यात्रा समय को काफी कम कर दिया है, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित, सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल रहा है।

धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सरकार ने ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया है। दुधवा, पीलीभीत और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व में आधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया है। यूपी ईको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के गठन से इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे योजना के जरिए स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिला है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 ने विश्व के सबसे बड़े और सुव्यवस्थित आयोजनों में अपनी मिसाल कायम की। वहीं अयोध्या का दीपोत्सव, बरसाना का रंगोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली जैसे आयोजन अब वैश्विक पर्यटकीय कैलेंडर का हिस्सा बन चुके हैं, जो विदेशी पर्यटकों को भी बड़ी संख्या में आकर्षित कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में पर्यटन विकास ने न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है, बल्कि होटल, गाइड, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले हैं। उत्तर प्रदेश आज सिर्फ एक पर्यटन राज्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।।