गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही पर बड़ा सवाल: युवराज मेहता की मौत में ‘शराब थ्योरी’ से ढकी जा रही है सिस्टम की नाकामी?
नोएडा | विशेष रिपोर्ट
दो टूक:: नोएडा/ सेक्टर-150 में युवा इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत अब केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं रह गई है। यह मामला तेजी से प्रशासनिक लापरवाही, जांच की दिशा और सच को दबाने की कोशिश पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर पुलिस गुरुग्राम के एक बार के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शराब और तेज रफ्तार की थ्योरी आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर घटनास्थल से जुड़े वीडियो और तथ्य नोएडा प्राधिकरण की बड़ी चूक को उजागर कर रहे हैं।
सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सिस्टम अपनी गलती छुपाने के लिए जांच को दूसरी दिशा में मोड़ रहा है?
15 दिन पहले हुआ हादसा, फिर भी नहीं चेता प्राधिकरण
युवराज की मौत से ठीक 15 दिन पहले उसी स्थान पर एक ट्रक अनियंत्रित होकर नाले में गिर गया था। इस दुर्घटना में नाले की सुरक्षा दीवार टूट गई थी, लेकिन इसके बाद भी न तो स्थायी मरम्मत कराई गई और न ही कोई अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए गए।
यदि उस समय प्राधिकरण सजग होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?
सेक्टर-150 जैसे आधुनिक और हाई-प्रोफाइल इलाके में, जहां रोजाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, वहां टूटी दीवार के बावजूद कोई बैरिकेडिंग नहीं की गई।
यह लापरवाही केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान को खतरे में डालने जैसा है।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में था?
रेस्क्यू में देरी ने छीनी जान?
हादसे के बाद कार नाले में गिर गई, लेकिन आरोप है कि करीब दो घंटे तक प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दीवार समय रहते ठीक कर दी जाती या रेस्क्यू तुरंत शुरू होता, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। यह देरी भी सिस्टम की गंभीर विफलता की ओर इशारा करती है।
बार के निजी सीसीटीवी और बिल मीडिया तक कैसे पहुंचे?
मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है।
युवराज के गुरुग्राम स्थित एक बार में जाने से जुड़े निजी सीसीटीवी फुटेज और बिल की तस्वीरें मीडिया तक पहुंच गईं।
सवाल यह है कि:
- बार प्रबंधन ने ये निजी साक्ष्य किसके कहने पर सार्वजनिक किए?
- क्या यह सब जानबूझकर किया गया ताकि जांच का फोकस निर्माणाधीन साइट की लापरवाही से हटाकर व्यक्तिगत आचरण पर डाला जा सके?
आमतौर पर इस तरह के फुटेज और बिल सार्वजनिक नहीं किए जाते, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
शराब और रफ्तार की बहस, लेकिन सिस्टम की चुप्पी
शराब और तेज रफ्तार की जांच जरूरी हो सकती है, लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि:
- टूट चुकी दीवार को ठीक क्यों नहीं किया गया?
- निर्माणाधीन साइट पर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ?
- जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक केवल शराब की थ्योरी पेश करना अधूरा और भटकाने वाला न्याय माना जाएगा।
न्याय की मांग
युवराज मेहता की मौत एक परिवार की त्रासदी भर नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मामला है।
जनता और परिजन मांग कर रहे हैं कि:
- इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो
- नोएडा प्राधिकरण के लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
- भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सुरक्षा मानकों को तत्काल दुरुस्त किया जाए
अब देखना यह है कि क्या सच सामने आएगा या फिर सवालों की यह फाइल भी सिस्टम की चुप्पी में दबा दी जाएगी।।
