गौतमबुद्धनगर: मुख्य विकास अधिकारी की अगुवाई में सीदीपुर बिसरख का तालाब बना जल संरक्षण का मॉडल, सामुदायिक उत्सव में दिखी ग्रामीणों की भागीदारी!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक:: गौतम बुद्ध नगर।
जनपद के ग्राम सीदीपुर बिसरख में तालाब पुनर्जीवन को लेकर एक अनुकरणीय उदाहरण सामने आया है। मुख्य विकास अधिकारी गौतम बुद्ध नगर डॉ. शिवाकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में सीदीपुर तालाब के सफल पुनर्जीवन के उपलक्ष्य में सामुदायिक उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और ग्रामीणों की संयुक्त सहभागिता देखने को मिली।
यह कार्यक्रम डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स एवं एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने अपने संबोधन में जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्व में उपलब्ध कुल जल का बहुत सीमित हिस्सा ही उपयोग योग्य है, ऐसे में तालाब, जलाशय और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी तालाब का दीर्घकालिक संरक्षण तभी संभव है, जब स्थानीय समुदाय स्वयं उसे अपनी धरोहर मानकर उसकी देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए।
इस अवसर पर डॉ. शिवाकांत द्विवेदी द्वारा सीदीपुर तालाब के कायाकल्प की संपूर्ण प्रक्रिया एवं सामुदायिक सहभागिता को दर्शाने वाली पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। यह आयोजन नेचुरल इकोसिस्टम रिस्टोरेशन कार्यक्रम के अंतर्गत ‘हमारे तालाब, हमारी पहचान’ पहल तथा ‘जल कनेक्ट अभियान : ReStorying Our Ponds’ के तहत किया गया।
कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी बिसरख फनिश कुमार, सीदीपुर ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, आसपास के गांवों के पंचायत सदस्य तथा लगभग 100 ग्रामीणों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने तालाब समिति के सदस्यों के साथ पुनर्जीवित तालाब का भ्रमण किया और तालाब के पहले और बाद की स्थिति को दर्शाने वाली फोटो वॉल का अवलोकन किया।
मुख्य विकास अधिकारी ने ग्राम प्रधानों, एचसीएल फाउंडेशन की टीम तथा तालाब पुनर्जीवन में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को सम्मानित किया। साथ ही, तालाब संरक्षण में सक्रिय योगदान देने वाले स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे अन्य गांवों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर कार्य करें तो पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन संभव है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण विकास को भी मजबूती मिलती है।।
