शनिवार, 3 जनवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: आवारा पशुओं पर आदेश की गलत व्याख्या से बढ़ी क्रूरता, गलत आंकड़ों पर उठा सवाल!!

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गौतमबुद्धनगर:  आवारा पशुओं पर आदेश की गलत व्याख्या से बढ़ी क्रूरता, गलत आंकड़ों पर उठा सवाल!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक:: नोएडा। देश में रेबीज, पशु क्रूरता और आवारा जानवरों की संख्या को लेकर भ्रामक आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, जिससे न केवल जनमत को गुमराह किया जा रहा है बल्कि पशुओं के खिलाफ हिंसा को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह गंभीर आरोप एनिमल एक्टिविस्ट्स ने शुक्रवार को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए।

पशु अधिकार कार्यकर्ता और फ़िल्ममेकर संक्षय बब्बर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या ने हालात को और भयावह बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “संस्थागत क्षेत्रों” से आवारा कुत्तों को हटाने की बात पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 की मूल भावना के विपरीत है, जिसमें नसबंदी के बाद कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र में ही छोड़ना अनिवार्य है।

संक्षय बब्बर का आरोप है कि इस आदेश को कुछ तत्वों द्वारा “क्रूरता के लाइसेंस” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पशु-विरोधी मानसिकता को बढ़ावा मिला है और देशभर में जानवरों के खिलाफ हिंसक घटनाओं में तेज़ उछाल आया है।

एनिमल एक्टिविस्ट्स के मुताबिक, जमीनी स्तर पर काम कर रहे संगठनों की साप्ताहिक रिपोर्टों में पशुओं के खिलाफ 1000 से अधिक अपराध दर्ज किए गए हैं। दिल्ली, भोपाल, कर्नाटक सहित कई राज्यों से सामने आई घटनाएं समाज को झकझोरने वाली हैं, जिनमें पिल्लों पर बर्बरता, ज़हर देकर हत्या और यौन हिंसा जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि पशुओं को खाना खिलाने वाली महिलाओं, विशेषकर महिला फीडर्स, को लगातार धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली, गाजियाबाद और अन्य शहरों से ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां मामूली विवादों के बाद हिंसा तक की नौबत आ गई।

देशभर से आए पशु अधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि अदालत के आदेशों की सही व्याख्या कर उन्हें सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो इसके गंभीर सामाजिक और मानवीय परिणाम सामने आ सकते हैं।

अंत में वक्ताओं ने सरकार और न्यायपालिका से अपील की कि गलत आंकड़ों और भ्रम फैलाने वाली सूचनाओं पर रोक लगाई जाए तथा पशु संरक्षण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि इंसान और जानवरों के बीच संतुलन और संवेदनशीलता बनी रहे।।