अम्बेडकर नगर :
योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस की कसौटी पर एमएलसी हरिओम पांडे का मामला।
●मृत्यु, साजिश और जमीन हड़पने के आरोपों से घिरा एमएलसी परिवार
।।।ए के चतुर्वेदी।।
दो टूक : अम्बेडकर नगर के एमएलसी हरिओम पांडे पर आरोपों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है। अभी अयोध्या जनपद के गद्दोपुर में जमीन कब्जाने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब अम्बेडकरनगर जनपद के आलापुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत आरिबपुर से एक और गंभीर मामला सामने आ गया है।
यहां पीड़िता नंदिका देवी ने आरोप लगाया है कि एमएलसी हरिओम पांडे की पत्नी अंजू पांडे ने साजिश के तहत निर्माणाधीन रामनारायण गर्ल्स डिग्री कॉलेज पर अवैध कब्जा कर लिया है। नंदिका देवी के अनुसार उक्त भूमि उनके पति स्वर्गीय हीरालाल शर्मा द्वारा आकांक्षा स्मृति विद्यालय शिक्षा समिति को दान की गई थी, जिस पर वर्ष 2013 से कॉलेज का निर्माण कार्य चल रहा था। इस निर्माण के लिए विधायक निधि से भी धनराशि स्वीकृत की गई थी।
आरोप है कि इसी दौरान ग्रामर्षि एकेडमी इंटरनेशनल की प्रबंधक अंजू पांडे ने दबाव बनाकर 30 अप्रैल 2019 को तीन वर्ष का एग्रीमेंट कराया और उसी के आधार पर कॉलेज परिसर पर कब्जा कर लिया। पीड़िता का कहना है कि उक्त एग्रीमेंट की अवधि 30 अप्रैल 2022 को समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद आज तक कॉलेज खाली नहीं किया गया, जबकि कानूनन किसी शैक्षणिक संस्था की भूमि या भवन का व्यक्तिगत रूप से क्रय-विक्रय या कब्जा नहीं किया जा सकता।
नंदिका देवी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति हीरालाल शर्मा की 24 दिसंबर 2022 को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई थी। इससे पहले आशा देवी नामक महिला द्वारा उन्हें प्रेम जाल में फंसाकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए, बैंक खातों से धनराशि निकलवाई गई और उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया गया।
पीड़िता का आरोप है कि आशा देवी, अंजू पांडे और एमएलसी हरिओम पांडे के बीच करीबी संबंध हैं और तीनों मिलकर सुनियोजित तरीके से उसकी संपत्ति और शैक्षणिक संस्था को हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। नंदिका देवी ने मुख्यमंत्री से कॉलेज को कब्जा-मुक्त कराने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इस संबंध में पहले भी जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। अब पीड़िता ने पुनः जिलाधिकारी अम्बेडकर नगर से निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
बताया गया है कि इसी प्रकरण में आशा देवी एवं हीरालाल शर्मा के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 419 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज है और वे इस मामले में जेल भी जा चुके हैं।
बाबा की सरकार में, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करते हैं, वहीं बाबा के ही नाम पर सत्ता और प्रभाव का लाभ उठाने वाले लोगों पर इस तरह के गंभीर आरोप सामने आना सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। एक ओर सरकार जनता के विश्वास और कानून-व्यवस्था की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में कार्रवाई न होना आम लोगों के भरोसे को कमजोर कर रहा है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में कितनी निष्पक्षता और सख्ती से कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय कब तक मिल पाता है।
