गुरुवार, 5 नवंबर 2026

लखनऊ :त्योहार पर डग्गामार बस सीज, यार्ड में कैद हुए मुसाफिर।||Lucknow:Illegal buses seized during the festival, passengers trapped in the yard.||

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लखनऊ :
त्योहार पर डग्गामार बस सीज,यार्ड में कैद हुए मुसाफिर।
◆बच्चे-बुजुर्ग घंटों धूल फांकने को मजबूर, वैकल्पिक बस का इंतजाम नहीं; ड्राइवर फरार, एजेंटों ने भी झाड़ा पल्ला।।
दो टूक : त्योहार पर घर पहुंचने की उम्मीद लेकर निकले बिहार के यात्रियों के लिए लखनऊ में सफर मुसीबत बन गया। पीजीआई क्षेत्र की वृंदावन योजना सेक्टर-9 स्थित यार्ड में ए-आरटीओ ने हरियाणा से बिहार जा रही सवारियों से भरी डग्गामार बस सीज कर दी। कार्रवाई के बाद बस में सवार बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य यात्री घंटों यार्ड में फंसे रहे। न दूसरी बस का इंतजाम हुआ और न ही उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की कोई जिम्मेदारी लेने वाला सामने आया। दोपहर से शाम हो गई, लेकिन यात्रियों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती गई। आरोप है कि बस चालक आश्वासन देने के बाद फरार हो गया और बस सर्विस के एजेंटों ने भी मोबाइल बंद कर लिया।
विस्तार : 
परिवहन नियमों का उल्लंघन करने वाली डग्गामार बसों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि वाहन सीज होने के बाद उसमें सवार यात्रियों को बीच रास्ते में उनके हाल पर छोड़ देना क्या उचित है? कार्रवाई परिवहन नियमों के तहत होनी चाहिए, मगर यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी से विभाग मुंह नहीं मोड़ सकता।
यात्रियों के मुताबिक, हरियाणा के पानीपत सेक्टर-29 स्थित कृष्णा गार्डन की नवीन बस सर्विस की बस संख्या HP-28-Z-7160 से वे बिहार जा रहे थे। इसके लिए प्रत्येक यात्री से करीब दो हजार रुपये किराया वसूला गया था। आरोप है कि सामान के नाम पर अलग से रकम ली गई और टिकट के बजाय सफेद कागज की पर्ची थमा दी गई। यात्रियों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि बस के दस्तावेज वैध हैं या नहीं। गुरुवार सुबह लखनऊ पहुंचने पर पीजीआई थाना क्षेत्र की वृंदावन योजना सेक्टर-9 में ए-आरटीओ की कार्रवाई के दौरान बस सीज कर दी गई।
बस सीज होते ही यात्रियों की मुश्किलें शुरू हो गईं। बस में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। घंटों तक यार्ड में बैठकर दूसरी बस का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। यात्रियों का कहना है कि त्योहार के चलते ट्रेनों में भारी भीड़ थी। ऐसे में महंगा किराया देकर बस से सफर करने का फैसला किया था, लेकिन बीच रास्ते में इस तरह फंस जाएंगे, इसका अंदाजा नहीं था।
◆बस सर्विस दोपहरभर दिलासा,शाम होते ही चालक फरार।।
यात्रियों का आरोप है कि बस चालक दोपहर तक दूसरी बस उपलब्ध कराने का आश्वासन देता रहा, लेकिन शाम होते-होते वह मौके से गायब हो गया। बस सर्विस के एजेंटों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनके मोबाइल फोन बंद मिले। यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या बच्चों और बुजुर्गों के साथ सामान लेकर अनजान जगह पर भटकने की थी। उनका कहना था कि जब प्रशासन ने बस सीज की है तो यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रशासन को करानी चाहिए।
◆दो हजार किराया वसूला, टिकट के नाम पर थमा दी सफेद पर्ची।
यात्रियों ने बस संचालकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिहार तक पहुंचाने के नाम पर प्रत्येक सवारी से दो हजार रुपये वसूले गए। लगेज का अलग से पैसा लिया गया, लेकिन विधिवत टिकट देने के बजाय सफेद पर्ची पकड़ा दी गई। यात्रियों का आरोप है कि डग्गामार बसों का संचालन करने वाले गिरोह के लोग भोले-भाले ग्रामीण यात्रियों को इसी तरह झांसे में लेकर सफर कराते हैं, ताकि शिकायत की स्थिति में उनके पास यात्रा का पुख्ता प्रमाण भी न रहे।
आरोप यह भी है कि बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां भूसे की तरह ठूंस दी जाती हैं। यात्रियों ने सवाल उठाया कि परिवहन नियमों का उल्लंघन कर कमाई करने वाले बस संचालकों और एजेंटों पर कार्रवाई कब होगी?
◆ डबल डेकर बसों के हादसों के बाद भी नहीं चेता सिस्टम।
राजधानी और आसपास के इलाकों में डग्गामार बसों से जुड़े हादसे पहले भी जानलेवा साबित हो चुके हैं। 15 मई 2025 को मोहनलालगंज क्षेत्र में किसान पथ पर बिहार के बेगूसराय से दिल्ली जा रही डबल डेकर बस में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद बस चालक और क्लीनर के मौके से भागने की बात भी सामने आई थी।
वहीं, 23 फरवरी 2026 को गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बिहार जा रही एक बस पलट गई थी। हादसे में कई यात्री घायल हुए थे, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया था।
लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसों के बावजूद अवैध और अनियमित बस संचालन पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। कार्रवाई के नाम पर केवल वाहन सीज कर देना पर्याप्त नहीं है। यात्रियों को सुरक्षित सफर, वैध टिकट और आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना भी परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
◆ जिम्मेदार अधिकारियों से नहीं हो सका संपर्क।
मामले में ए-आरटीओ आलोक यादव से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उपलब्ध मोबाइल नंबर बंद मिला। वहीं स्थानीय पुलिस स्टेशन के सीयूजी नंबर पर भी संपर्क किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में यात्रियों की परेशानी और उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने के सवालों पर जिम्मेदार पक्ष का जवाब नहीं मिल सका।
◆महिला मुसाफिर की पीडि उनकी ही जुबानी।।