लखनऊ :
एण्टी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते कानूनगो को किया गिरफ्तार,राजस्व कर्मियों मे मचा हड़कंप।
● जमीन का नक्शा दुरुस्त कराने के नाम पर मांगी थी घूस, अमेठी में एंटी करप्शन टीम ने दबोचा।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज तहसील में रिश्वतखोरी का मामला एक बार फिर सामने आया है। गोसाईंगंज निवासी प्रताप यादव से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) हरेंद्र सिंह को शनिवार को एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने गोसाईंगंज के अमेठी इलाके में जाल बिछाकर कार्रवाई की। गिरफ्तारी की खबर से तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया।
विस्तार :
मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को लखनऊ के तहसील मोहनलालगंज मे तैनात एक कानून गो को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथो गिरफ्तार कर थाना गोसाईगंज मे दाखिल कर अग्रिम विधिक कार्रवाई मे जुटी हुई है।
आरोप है कि कानूनगो ने जमीन का नक्शा दुरुस्त कराने और राजस्व संबंधी कार्रवाई के नाम पर 50 हजार रुपये मांगे थे। शिकायतकर्ता की शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर विनोद कुमार के नेतृत्व में एंटी करप्शन टीम ने ट्रैप लगाया और शनिवार दोपहर करीब तीन बजे रिश्वत लेते ही हरेंद्र सिंह को दबोच लिया।
◆गिरफ्तारी पर अफवाह, तीन घंटे तक मचा रहा हड़कंप।
कार्रवाई के दौरान इलाके में कानूनगो के अपहरण की अफवाह फैल गई। तहसील के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। करीब तीन घंटे बाद गिरफ्तारी की असल वजह सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हुई। वहीं, स्थानीय प्रशासन को समय से सूचना न दिए जाने और आरोपी को थाने ले जाने में देरी को लेकर भी सवाल उठे। रात 9:20 बजे तक गोसाईंगंज पुलिस के मुताबिक न तो कोई तहरीर मिली थी और न ही आरोपी को थाने लाया गया था।
●तीसरी बार रिश्वतखोरी में फंसे तहसील के राजस्वकर्मी।
मोहनलालगंज तहसील में यह पहला मामला नहीं है। दिसंबर 2023 में कानूनगो शशिकांत उपाध्याय और उसके सहयोगी मुंशी मोनू शर्मा 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे। फरवरी 2021 में राजस्व निरीक्षक जय प्रकाश श्रीवास्तव को 15 हजार रुपये की घूस लेते विजिलेंस टीम ने गिरफ्तार किया था। अब 50 हजार की रिश्वत के आरोप में हरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी ने तहसील की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि बार-बार राजस्वकर्मियों की गिरफ्तारी के बावजूद तहसील में रिश्वतखोरी का खेल क्यों नहीं थम रहा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी या हर बार एक कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद व्यवस्था को क्लीन चिट मिलती रहेगी?
