गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण के विकास कार्यों पर उठे सवाल, असगरपुर में एक महीने में ही खराब हुआ पीसीबी; ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की मांग!!
घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और कार्य में लापरवाही का आरोप, किसान नेता सचिन अवाना ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजी शिकायत; दोषियों पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई की मांग
दो टूक//नोएडा। ग्राम असगरपुर, सेक्टर-128 में नोएडा प्राधिकरण की ओर से कराए गए पीसीबी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण कार्य पूरा हुए अभी करीब एक महीना ही बीता है, लेकिन पीसीबी की वर्तमान स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इतनी कम अवधि में निर्माण कार्य की हालत बिगड़ने से कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही और मानकों की अनदेखी किए जाने की आशंका जताई है।
इस मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिला सचिव (नोएडा) एवं किसान नेता सचिन अवाना ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण से टेंडर प्राप्त करने वाले ठेकेदारों द्वारा कराए गए कार्य में गुणवत्ता का उचित ध्यान नहीं रखा गया। निर्माण कार्य पूरा होने के महज एक महीने के भीतर ही उसकी स्थिति खराब होना ठेकेदार की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
किसान नेता सचिन अवाना ने मांग की है कि ग्राम असगरपुर में कराए गए पीसीबी कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच हो तथा यह भी पता लगाया जाए कि कार्य निर्धारित मानकों और टेंडर की शर्तों के अनुरूप कराया गया था या नहीं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए, ताकि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में घटिया सामग्री के इस्तेमाल, मानकों की अनदेखी या ठेकेदार की लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की जाए। केवल कागजों में कार्य पूरा दिखाकर जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है। सरकारी धन से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए।
सचिन अवाना ने यह भी मांग की कि खराब हो चुके पीसीबी निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों के अनुसार दोबारा दुरुस्त कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
किसान नेता ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद यदि एक महीने में ही निर्माण की गुणवत्ता जवाब दे जाए तो यह गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में केवल खानापूर्ति नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण और दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई जरूरी है।
अब देखना होगा कि नोएडा प्राधिकरण इस शिकायत पर कितनी गंभीरता से संज्ञान लेता है और ग्राम असगरपुर में हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।।
