रविवार, 1 नवंबर 2026

गौतमबुद्धनगर: 32 साल की गौरवशाली पुलिस सेवा के बाद डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने वर्दी को कहा अलविदा, विदाई समारोह में भावुक हुए अधिकारी-कर्मचारी!!

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गौतमबुद्धनगर: 32 साल की गौरवशाली पुलिस सेवा के बाद डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने वर्दी को कहा अलविदा, विदाई समारोह में भावुक हुए अधिकारी-कर्मचारी!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

PPS में डिप्टी एसपी से शुरू हुआ सफर, पदोन्नति पाकर बने 2010 बैच के IPS अधिकारी; अयोध्या आतंकी हमले में अदम्य साहस के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से हुए सम्मानित

अयोध्या की रणभूमि से नोएडा की कर्मभूमि तक शौर्य, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बना रहा करीब 32 वर्षों का सफर

दो टूक//नोएडा। पुलिस की वर्दी केवल एक पोशाक नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन, जिम्मेदारी और जनसेवा का प्रतीक होती है। कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जो अपने कार्यकाल के दौरान केवल पद और जिम्मेदारियां ही नहीं निभाते, बल्कि अपने कार्यों, व्यवहार और व्यक्तित्व से ऐसी पहचान बना जाते हैं, जिसे लंबे समय तक याद किया जाता है। ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) एवं डीआईजी के पद पर तैनात रहे डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने 31 अक्टूबर 2026 को करीब 32 वर्षों की गौरवशाली पुलिस सेवा पूर्ण कर वर्दी को अंतिम सलाम किया।

उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर पुलिस कमिश्नरेट के सभागार में गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया। समारोह में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। इस दौरान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने डॉ. राजीव नारायण मिश्र को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनके लंबे सेवाकाल की सराहना की। सभागार में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने तालियों की गूंज के बीच उन्हें भावभीनी विदाई दी। समारोह का माहौल भावुक और गौरवपूर्ण रहा। सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए अनुभव साझा करते हुए उनके अनुशासन, कार्यशैली, सहज व्यवहार और कर्तव्य के प्रति समर्पण को याद किया।

डिप्टी एसपी से IPS और DIG तक का गौरवशाली सफर

डॉ. राजीव नारायण मिश्र की पुलिस सेवा की शुरुआत 23 अक्टूबर 1994 को प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के माध्यम से डिप्टी एसपी (Dy. SP) के पद पर नियुक्ति के साथ हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत, अनुभव और कार्यक्षमता के बल पर पुलिस विभाग में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सेवाकाल के दौरान पदोन्नति प्राप्त कर वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए और 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी बने।

करीब 32 वर्षों की इस सेवा यात्रा में उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों और पुलिस की महत्वपूर्ण इकाइयों में अपनी सेवाएं दीं। डिप्टी एसपी के पद से शुरू हुआ उनका सफर आईपीएस अधिकारी और डीआईजी के पद तक पहुंचा। 31 अक्टूबर 2026 को गौतमबुद्धनगर में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्होंने पुलिस सेवा से विदाई ली।

अयोध्या आतंकी हमले में अदम्य साहस का परिचय, राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित

डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पुलिस सेवाकाल का सबसे उल्लेखनीय अध्याय 5 जुलाई 2005 को अयोध्या में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। उस दिन पांच फिदायीन आतंकियों ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर को निशाना बनाने का प्रयास किया था। गोलियों की तड़तड़ाहट और आतंकियों के हमले के बीच डॉ. मिश्र ने अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय देते हुए मोर्चा संभाला। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस साहसिक कार्रवाई के लिए उन्हें महामहिम राष्ट्रपति द्वारा वीरता पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके व्यक्तिगत शौर्य, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। अयोध्या की उस चुनौतीपूर्ण घटना ने उनके पुलिस सेवाकाल को एक विशिष्ट पहचान दी।

STF, ATS और PAC जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में निभाईं जिम्मेदारियां

अपने लंबे पुलिस सेवाकाल के दौरान डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी, बरेली, मेरठ, कुशीनगर और प्रयागराज सहित विभिन्न जनपदों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अलावा स्पेशल टास्क फोर्स (STF), एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) जैसी महत्वपूर्ण पुलिस इकाइयों में भी उन्होंने सेवाएं दीं।

अपराध नियंत्रण, संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई, आतंकवाद निरोधक अभियानों, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस बल के अनुशासन को मजबूत करने में उनके अनुभव का उपयोग किया गया। प्रयागराज में महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के सफल और शांतिपूर्ण संचालन में भी उन्होंने प्रशासनिक एवं पुलिस प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

नोएडा में यातायात व्यवस्था से लेकर कानून-व्यवस्था तक छोड़ी छाप

नोएडा और गौतमबुद्धनगर से भी डॉ. राजीव नारायण मिश्र का विशेष जुड़ाव रहा। उन्होंने यहां पुलिस अधीक्षक यातायात के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान यातायात व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए। ऑटोमेटेड ई-चालान व्यवस्था को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को भी याद किया जाता है।

इसके बाद गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के रूप में उन्होंने जनपद की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। विभिन्न चुनौतियों के बीच पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने पर उनका विशेष जोर रहा।

सादगी, विनम्रता और अनुशासन बनी व्यक्तित्व की पहचान

डॉ. राजीव नारायण मिश्र की पहचान केवल एक अनुभवी और अनुशासित पुलिस अधिकारी के रूप में ही नहीं रही, बल्कि उनके सहज, सरल और मिलनसार व्यवहार ने भी उन्हें अलग पहचान दिलाई। उनके साथ काम कर चुके अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुसार, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना, अधीनस्थ कर्मचारियों की बात सुनना और जिम्मेदारियों का निष्पक्षता से निर्वहन करना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं रहीं।

कड़क वर्दी के साथ मानवीय संवेदनाओं का संतुलन उनकी कार्यशैली में दिखाई देता था। यही वजह रही कि वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर पुलिसकर्मियों तक उनके प्रति सम्मान और आत्मीयता का भाव रहा। उनके सहकर्मी उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने पद की गरिमा के साथ मानवीय व्यवहार को भी हमेशा महत्व दिया।

कानपुर की धरती से निकले, शिक्षा और मेहनत के दम पर बनाया मुकाम

डॉ. राजीव नारायण मिश्र का जन्म कानपुर की धरती पर विजयादशमी के शुभ अवसर पर हुआ। उच्च प्रशासनिक पारिवारिक पृष्ठभूमि में पले-बढ़े डॉ. मिश्र ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने एम.कॉम. के साथ पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर पुलिस सेवा में प्रवेश किया और अपनी मेहनत, क्षमता तथा कर्तव्यनिष्ठा के बल पर विभाग में महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे।

वर्दी उतरी, लेकिन 32 वर्षों की सेवाओं की पहचान हमेशा रहेगी कायम

पुलिस सेवा में करीब 32 वर्षों का सफर अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डॉ. राजीव नारायण मिश्र की सेवा यात्रा एक डिप्टी एसपी के रूप में शुरू होकर आईपीएस अधिकारी और डीआईजी के पद तक पहुंची। इस दौरान उन्होंने अनेक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया और अलग-अलग जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्ति के साथ उनकी सक्रिय पुलिस सेवा का अध्याय भले ही पूरा हो गया, लेकिन उनके सेवाकाल के अनुभव, साहसिक कार्य और प्रशासनिक योगदान लंबे समय तक याद किए जाएंगे। विदाई समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों की भावुकता ने यह दर्शाया कि किसी अधिकारी की असली उपलब्धि केवल उसका पद और पुरस्कार नहीं, बल्कि अपने कार्यों से अर्जित लोगों का विश्वास और सम्मान होता है।

डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने वर्दी को भले ही अंतिम सलाम कर दिया हो, लेकिन करीब 32 वर्षों की उनकी सेवाओं, अयोध्या में प्रदर्शित अदम्य साहस और पुलिस विभाग में दिए गए योगदान की पहचान हमेशा कायम रहेगी।