शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

गौतमबुद्धनगर: बरौला का राजकीय पशु चिकित्सालय तीन दिन से बंद, बीमार पशुओं को लेकर भटक रहे पशुपालक; भाकियू लोकशक्ति ने उठाई आवाज!!

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गौतमबुद्धनगर: बरौला का राजकीय पशु चिकित्सालय तीन दिन से बंद, बीमार पशुओं को लेकर भटक रहे पशुपालक; भाकियू लोकशक्ति ने उठाई आवाज!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

जनगणना ड्यूटी के चलते 5 से 7 नवंबर तक अस्पताल बंद रखने का नोटिस चस्पा, 30 से 32 गांवों के पशुपालकों के सामने इलाज का संकट

बीसी प्रधान बोले– जनगणना जरूरी है, लेकिन पशुओं की आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं बंद करना उचित नहीं, प्रशासन तत्काल करे वैकल्पिक व्यवस्था

दो टूक//नोएडा। गौतमबुद्धनगर के बरौला स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में पिछले तीन दिनों से ताला लटका होने के कारण क्षेत्र के पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लगा है और बाहर नोटिस चस्पा कर दिया गया है कि जनगणना ड्यूटी के कारण 5, 6 और 7 नवंबर 2026 को चिकित्सालय बंद रहेगा। अस्पताल बंद होने से बरौला समेत आसपास के करीब 30 से 32 गांवों के पशुपालकों के सामने अपने बीमार पशुओं के इलाज का संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय पशुपालकों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 10 से 15 लोग अपने बीमार पशुओं को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सालय बंद मिलने के कारण उन्हें बिना उपचार कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, चपरासी और चौकीदार सहित पूरा स्टाफ अनुपस्थित है। ऐसे में अस्पताल में दवाइयों और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता होने के बावजूद पशुओं को उपचार नहीं मिल पा रहा है।

इसका एक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब एक पशुपालक अपनी बीमार गाय को लेकर चिकित्सालय पहुंचा। गाय सर्दी और बुखार से पीड़ित थी, लेकिन अस्पताल पर ताला लगा होने के कारण उसे उपचार नहीं मिल सका। मजबूरन पशुपालक को अपनी बीमार गाय के साथ वापस लौटना पड़ा। पशुपालकों का कहना है कि यदि समय रहते बीमार पशुओं को उपचार नहीं मिला तो उनकी हालत और बिगड़ सकती है।

भाकियू लोकशक्ति ने उठाया मुद्दा, प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

राजकीय पशु चिकित्सालय की इस स्थिति को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने आवाज उठाई है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने महानगर अध्यक्ष एवं अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर अस्पताल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पशुपालकों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि गांवों के पशुपालकों के लिए उनके पशु केवल जानवर नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में जब कोई पशु बीमार होता है तो पशुपालक सबसे पहले सरकारी पशु चिकित्सालय पहुंचता है, लेकिन अस्पताल पर ताला मिलने से उसे निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, "आज महानगर अध्यक्ष की टीम के साथ बरौला स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय पहुंचे तो वहां की स्थिति देखकर बेहद चिंता हुई। जनगणना ड्यूटी अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके चलते गांवों की पशु चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं होनी चाहिए। 30 से 32 गांवों के पशुपालक इस अस्पताल पर निर्भर हैं। रोजाना लोग अपने बीमार पशुओं को लेकर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें उपचार नहीं मिल रहा। प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। कम से कम एक डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि किसी भी पशुपालक को बिना इलाज वापस न लौटना पड़े।"

चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। भाकियू लोकशक्ति इस मामले को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएगी और जब तक पशुपालकों को नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं होती, तब तक इस मुद्दे पर आवाज उठाती रहेगी।

महानगर अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह बोले– अस्पताल और दवाइयां हैं, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं

इस संबंध में महानगर अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह ने कहा कि पशु चिकित्सालय में भवन और दवाइयों की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन उपचार करने वाला कोई कर्मचारी नहीं है। जनगणना का कार्य महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बंद कर देना उचित नहीं है। कम से कम एक डॉक्टर की ड्यूटी अस्पताल में अनिवार्य रूप से लगाई जानी चाहिए थी।

उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर सीएमओ से भी बातचीत की गई, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब गांवों में स्कूलों के बंद होने से पहले ही लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में यदि अस्पतालों पर भी ताले लगने लगेंगे तो ग्रामीण और पशुपालक अपनी समस्याएं लेकर कहां जाएंगे?

प्रशासन से तत्काल व्यवस्था बहाल करने की मांग

भाकियू लोकशक्ति ने जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांग की है कि बरौला स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में तत्काल डॉक्टर और आवश्यक कर्मचारियों की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। जनगणना जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान भी पशुओं की आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रखी जाएं, ताकि किसी पशुपालक को अपने बीमार पशु का इलाज कराने के लिए भटकना न पड़े।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग इस समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और क्षेत्र के पशुपालकों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाते हैं।।