सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

सुल्तानपुर :भाव पूर्वक मनायी गई वाल्मीकि जयंती में साहित्य संगोष्ठी संपन्न।।||Sultanpur:A literary symposium was held during the passionate celebration of Valmiki Jayanti.||

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सुल्तानपुर :
भाव पूर्वक मनायी गई वाल्मीकि जयंती में साहित्य संगोष्ठी संपन्न।।
दो टूक : अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में रामरती इंटरमीडिएट कॉलेज द्वारिका गंज सुल्तानपुर के हाल में शरद पूर्णिमा पर महाकवि वाल्मीकि की जयंती बहुत ही भावपूर्ण ढंग में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जिसमें विद्वान कवियों और सुधी साहित्यकारों ने सहभाग किया।जिसकी अध्यक्षता लोक भूषण डॉ आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप मुख्य अतिथि के रूप में डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु, विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कहानीकार दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश मंचासीन रहे। कुशल संचालन अंश तिवारी और डॉ करुणेश भट्ट ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के आराधना से हुई। वाणी वंदना राज बहादुर राना ने - कसे कर में सितार-से किया।पाठ्य पुस्तक लेखक,शिक्षक सर्वेश कान्त वर्मा सरल ने विद्वान अतिथियों का स्वागत वाचन किया।अवधी कवि पवन कुमार सिंह ने वाल्मीकि जी पर मार्मिक कविता पढ़ी।राना ने-मैं कलम की स्याही को मरहम बनाने जा रहा हूँ। बृजेश वर्मा ने-मिले और मिलकर बिछुडे़-पढ़कर जीवन के प्रेम रस पर छाप डाला।नीलम वर्मा की कविता-किस ओर तेरी मंजिल किस ओर जा रहा है,ने आत्मोन्नति की सीख दी। कवि अनिल कुमार वर्मा 'मधुर' ने-वेदना गहरी हृदय में उठी, पंक्तियों से वाल्मीकि की कीर्ति गाया।नफीसा खातून-वह कहके चले मुलाकात बहुत है,तो रचना ने-स्वार्थ भरी दुनियां में,पढ़ी।

साहित्यकार डॉ राम प्यारे प्रजापति ने वाल्मीकि को काव्य का प्रथम सोपान बताते हुए जीवन परिचय दिया। कहानीकार चित्रेश ने वाल्मीकि को शून्य से शिखर की चेतना कहा। डॉ साहित्येन्दु ने जीव बध करने वालों का सम्मान अनुचित सिद्ध किया। संस्था के जिलाध्यक्ष आशुकवि मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने वाल्मीकि का जन्मदिन आज है सुललाम जैसी पंक्तियों के साथ काव्यपाठ,व्याख्यान और आभार प्रकट किया।अध्यक्षीय उद्बोधन में डा०प्रदीप ने वाल्मीकि की उत्पत्ति बताते हुए समापन किया।