गाजियाबाद: विजयादशमी पर लोनी में RSS का शस्त्र पूजन और पथ संचलन, राष्ट्रभक्ति व सामाजिक कर्तव्यों का दिया संदेश!!
दो टूक//लोनी। विजयादशमी के पावन पर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से लोनी महानगर के रज्जू भैया नगर स्थित कन्या डिग्री कॉलेज में शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संघ के 101वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने उत्साह और अनुशासन के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मार्गदर्शन भाग के माननीय संघचालक श्री संजीव कुमार जी ने स्वयंसेवकों को विजयादशमी एवं संघ स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें मर्यादा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से राष्ट्र, धर्म, समाज और देश के प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया।
गौ, बेटी, गीता और भारतीय संस्कारों के सम्मान पर दिया जोर
श्री संजीव कुमार जी ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर देते हुए गौ, बेटी, गीता, गायत्री, यज्ञ और संस्कारों के सम्मान की बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। संस्कारों से युक्त समाज ही राष्ट्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संघ की 100 वर्षों की यात्रा और स्वयंसेवकों के समर्पण का किया उल्लेख
अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी तथा संगठन को खड़ा करने में योगदान देने वाले अनेक स्वयंसेवकों के त्याग, तपस्या और समर्पण की चर्चा की। उन्होंने संघ की यात्रा से जुड़े कई प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए और बताया कि किस प्रकार स्वयंसेवकों ने राष्ट्रसेवा के उद्देश्य से कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
उन्होंने साहस, करुणा, राष्ट्रभक्ति और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और समाज के प्रति समर्पण ही इन मूल्यों का आधार है। देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत गीतों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से भारत माता के प्रति सम्मान एवं राष्ट्र के लिए समर्पित रहने का संदेश भी दिया गया।
भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रसंगों से आत्मशक्ति पहचानने की प्रेरणा
विजयादशमी के महत्व को समझाते हुए उन्होंने भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पर्व बुराई, अहंकार और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। हनुमान जी की शक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों से अपनी क्षमताओं को पहचानने और उनका सदुपयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज में छिपी बुराइयों और नकारात्मक प्रवृत्तियों को पहचानकर उनका उचित तरीके से विरोध करना आवश्यक है। शक्ति का उपयोग सदैव समाज की भलाई, सुरक्षा और सकारात्मक बदलाव के लिए होना चाहिए, न कि उसके दुरुपयोग के लिए।
कार्यक्रम में संघ के प्रचारक गोविंद जी, नगर संचालक शिव कुमार जी सहित अन्य पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित शस्त्र पूजन और पथ संचलन के माध्यम से अनुशासन, संगठन, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया गया।।
