लखनऊ :
फतेहपुर में गरजी लाखन आर्मी, विरासत बचाने को एकजुट होने का आह्वान।।
सूरज पासी बोले- कंसा पासी के किले और शिव मंदिर की सुरक्षा की लड़ाई जारी रहेगी।
दो टूक : महाराजा कंसा पासी के ऐतिहासिक किले और आराध्य भगवान शिव मंदिर के संरक्षण व सुरक्षा की मांग को लेकर लाखन आर्मी का जनजागरण अभियान गुरुवार को फतेहपुर पहुंचा। खागा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में संगठन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने पासी समाज से इतिहास और विरासत को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
विस्तार :
जनसभा में सूरज पासी ने कहा कि पासी समाज का इतिहास वीरता, संघर्ष और योगदान से भरा रहा है। महाराजा सुहेलदेव पासी, महाराजा कंसा पासी, महाराजा बिजली पासी और महाराजा लाखन पासी जैसे महापुरुषों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतिहास की जानकारी समाज में आत्मविश्वास और एकजुटता पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह महाबली हनुमान को उनकी शक्ति का स्मरण कराया गया था, उसी तरह समाज को भी अपनी ताकत और इतिहास का अहसास कराने की जरूरत है। छोटे-छोटे विवादों में उलझने के बजाय शिक्षा, संगठन और सामाजिक विकास को प्राथमिकता देने की अपील की।
‘दारू-मुर्गा के लालच में मत बंटो’
सूरज पासी ने चुनावी राजनीति का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर समाज को बांटने की कोशिश की जाती है। उन्होंने अपील की कि ‘दारू-मुर्गा’ जैसे लालच में समाज को नहीं बंटने देना है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देनी है।
उन्होंने कहा कि ‘पासी मतलब योद्धा, पासी मतलब रक्षक’ की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। समाज को अपनी धार्मिक परंपराओं, आस्था और ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने पर भी उन्होंने जोर दिया।
किले-मंदिर की सुरक्षा की लड़ाई जारी रखने का ऐलान
सूरज पासी ने कहा कि महाराजा कंसा पासी के किले और भगवान शिव मंदिर के संरक्षण एवं सुरक्षा का अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर है, जिसे सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने समाज के लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों के हाथ में कलम और युवाओं के हाथ में हुनर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाखन आर्मी का जनजागरण अभियान किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर समाज को इतिहास, विरासत और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
