शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

गौतमबुद्धनगर : गंभीर मरीजों के लिए पुलिस ने शुरू की‘ऑपरेशन फास्ट’ की पहल।।Gautam Buddha Nagar: Police launched 'Operation Fast' for critically ill patients.||

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गौतमबुद्धनगर: 

गंभीर मरीजों के लिए पुलिस ने शुरू की‘ऑपरेशन फास्ट’ की पहल।।

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

एम्बुलेंस को मिलेगा ग्रीन कॉरिडोर जैसा ट्रैफिक क्लियरेंस, 24 घंटे सक्रिय रहेगा विशेष कंट्रोल रूम; अस्पतालों और एम्बुलेंस संचालकों के लिए जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर 9218981716

दो टूक//नोएडा। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों, गंभीर रूप से बीमार मरीजों और ट्रॉमा पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में कमिश्नरेट पुलिस ने ‘ऑपरेशन फास्ट’ (FAST – Fast Ambulance Seamless Transition) विकसित किया है। इस व्यवस्था के तहत आपातकालीन एम्बुलेंस को ट्रैफिक जाम से निकालकर सुरक्षित, त्वरित और निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि किसी भी मरीज को केवल यातायात बाधा के कारण जीवनरक्षक उपचार मिलने में देरी न हो।

इस अभिनव पहल को पुलिस उपायुक्त मुख्यालय शैव्या गोयल ने रिसर्च के बाद तैयार कर प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और यातायात प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। पुलिस का मानना है कि हृदयाघात, स्ट्रोक, गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव और सड़क दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में प्रत्येक मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एम्बुलेंस को समय पर अस्पताल पहुंचाना किसी की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।

24 घंटे सक्रिय रहेगा एम्बुलेंस ट्रैफिक कंट्रोल रूम

ऑपरेशन फास्ट के तहत ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम में 24 घंटे संचालित होने वाला समर्पित एम्बुलेंस ट्रैफिक सुविधा सेल स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए विशेष समन्वय हेल्पलाइन नंबर 9218981716 जारी किया गया है। यह नंबर संबंधित अस्पतालों और एम्बुलेंस संचालकों को उपलब्ध कराया गया है।

व्यवस्था के अनुसार, जब भी किसी गंभीर मरीज या सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को लेकर एम्बुलेंस अस्पताल के लिए रवाना होगी और उसे ट्रैफिक सहायता की आवश्यकता होगी, तो एम्बुलेंस डिस्पैचर, अस्पताल का कंट्रोल रूम अथवा एम्बुलेंस कर्मी मरीज की स्थिति, गंतव्य और प्रस्तावित मार्ग की जानकारी इस विशेष कंट्रोल रूम को देंगे।

सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम संबंधित मार्ग पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से तत्काल संपर्क स्थापित करेगा। इसके बाद प्रमुख चौराहों पर पहले से ट्रैफिक क्लियरेंस, जरूरत के अनुसार अस्थायी सिग्नल प्रबंधन, विपरीत दिशा के यातायात का नियमन और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाएगी।

एम्बुलेंस के आगे बढ़ने के साथ खुलता जाएगा रास्ता

इस पूरी व्यवस्था को रोलिंग ट्रैफिक क्लियरेंस मैकेनिज्म पर आधारित किया गया है। यानी एम्बुलेंस जिस रास्ते से आगे बढ़ेगी, उसी के अनुसार क्रमवार चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस यातायात को नियंत्रित करती जाएगी। इससे एम्बुलेंस को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता मिल सकेगा और आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी से बचाने का प्रयास किया जाएगा।

आवश्यकता पड़ने पर शहर में स्थापित सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पीए सिस्टम) के माध्यम से वाहन चालकों को एम्बुलेंस के आने की पूर्व सूचना भी दी जाएगी, ताकि लोग समय रहते रास्ता दे सकें।

ट्रायल रन में 12 किलोमीटर का सफर करीब 10 मिनट में पूरा

इस व्यवस्था की व्यावहारिकता परखने के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस की ओर से ट्रायल रन भी आयोजित किया गया। इसमें व्यस्त ट्रैफिक के दौरान एक खाली एम्बुलेंस को चिल्ला बॉर्डर से मैक्स हॉस्पिटल और फोर्टिस हॉस्पिटल तक संचालित किया गया।

पुलिस के अनुसार, लगभग 12 किलोमीटर की दूरी प्रत्येक मार्ग पर करीब 10 मिनट में तय की गई। यह ट्रायल सुव्यवस्थित ट्रैफिक समन्वय के माध्यम से सामान्य यातायात को बाधित किए बिना किया गया।

इस परीक्षण से यह सामने आया कि यदि ट्रैफिक पुलिस, कंट्रोल रूम और एम्बुलेंस संचालकों के बीच समय पर समन्वय हो तो व्यस्त यातायात के दौरान भी एम्बुलेंस के सफर का समय काफी कम किया जा सकता है।

●सड़क हादसों और गंभीर ट्रॉमा मरीजों को मिलेगी प्राथमिकता

ऑपरेशन फास्ट का विशेष फोकस सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों और गंभीर ट्रॉमा मरीजों पर रहेगा। सिर में गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव, कई जगह फ्रैक्चर और अन्य जानलेवा स्थितियों में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाना बेहद जरूरी होता है।

ऐसे मामलों में दुर्घटनास्थल से अस्पताल तक एम्बुलेंस की तेज आवाजाही सुनिश्चित होने से उपचार में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने में भी यह व्यवस्था मददगार साबित हो सकती है।

यह पहल जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट की अवधारणा के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य समय पर आपातकालीन सहायता और बेहतर चिकित्सा समन्वय के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करना है।

अस्पतालों और एम्बुलेंस संचालकों को जोड़ा गया

इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिले के प्रमुख सरकारी एवं निजी अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवा प्रदाताओं और आपातकालीन डिस्पैच केंद्रों को समन्वय प्रणाली से जोड़ा गया है। अस्पतालों और एम्बुलेंस में नियुक्त ऑपरेटरों से अपील की गई है कि आपातकालीन एम्बुलेंस के रवाना होने की सूचना पहले ही उपलब्ध कराएं, जिससे ट्रैफिक पुलिस समय रहते संबंधित मार्ग पर आवश्यक व्यवस्था कर सके।

इसके अलावा जिले के प्रमुख अस्पतालों को जोड़ने वाले प्राथमिक मार्गों की भी पहचान की गई है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित ट्रैफिक प्रबंधन किया जा सके।

आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सड़क पर एम्बुलेंस दिखाई देने पर उसे तत्काल रास्ता दें। चौराहों और सड़कों को अनावश्यक रूप से अवरुद्ध न करें तथा आपातकालीन परिस्थितियों में ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

इसके लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थापित पीए सिस्टम के माध्यम से भी लगातार उद्घोषणा की जाएगी, ताकि वाहन चालकों को एम्बुलेंस को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया जा सके।

पुलिसिंग में तकनीक और मानवीय संवेदना का समन्वय

गौतमबुद्धनगर पुलिस की इस पहल का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गंभीर मरीज या सड़क दुर्घटना का पीड़ित केवल ट्रैफिक जाम के कारण समय पर इलाज से वंचित न रहे। ऑपरेशन फास्ट के माध्यम से तकनीक आधारित ट्रैफिक प्रबंधन, अस्पतालों के साथ समन्वय और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया को एक व्यवस्था में जोड़ने का प्रयास किया गया है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में शुरू की गई यह पहल आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को गति देने और बहुमूल्य जीवन बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इस व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पतालों, एम्बुलेंस संचालकों, ट्रैफिक पुलिस और आम नागरिकों के बीच समन्वय कितनी तत्परता से बना रहता है।।

◆गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की बाइट--