शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

गौतमबुद्धनगर: फर्जी डिग्री के खिलाफ मुहिम तेज करेंगे वीरेंद्र सिंह गुड्डू, बोले—पीड़ितों की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार!!

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गौतमबुद्धनगर: फर्जी डिग्री के खिलाफ मुहिम तेज करेंगे वीरेंद्र सिंह गुड्डू, बोले—पीड़ितों की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

नोएडा मीडिया क्लब में प्रेसवार्ता कर दस्तावेजों और बार काउंसिल की अनुशासनात्मक कार्रवाई का किया जिक्र, फर्जी डिग्री व पेशेवर अनियमितताओं के खिलाफ अभियान चलाने का किया ऐलान

दो टूक//नोएडा, 9 अक्टूबर 2026। फर्जी डिग्री और पेशेवर पंजीकरण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने अब ऐसे मामलों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए व्यापक अभियान शुरू करने की तैयारी की है। शुक्रवार को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को सामने लाना और पीड़ितों को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने में मदद करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास फर्जी डिग्री या पेशेवर पंजीकरण में गड़बड़ी से संबंधित ठोस साक्ष्य हैं, तो वे उसकी आवाज संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

प्रेसवार्ता के दौरान वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने गौतमबुद्ध नगर जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे अधिवक्ता मनोज कुमार भाटी का वकालत लाइसेंस निरस्त किए जाने से जुड़े मामले का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने अपनी शिकायत, प्रस्तुत दस्तावेजों और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति की कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में तथ्यों को संबंधित प्राधिकरण के सामने रखने के बाद कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप में केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि दस्तावेजी साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाना जरूरी है।

2021 में शिकायत देकर उठाया था मामला

वीरेंद्र सिंह गुड्डू के मुताबिक, उन्होंने 22 फरवरी 2021 को शपथ पत्र के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि मनोज कुमार भाटी 22 फरवरी 1991 से 30 अप्रैल 2009 तक भारतीय वायुसेना में कार्यरत रहे। गुड्डू का दावा था कि वायुसेना में सेवा के दौरान भाटी ने कथित तौर पर विभागीय अनुमति के बिना उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से पत्राचार के माध्यम से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और उसी के आधार पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से संबद्ध जनहित कॉलेज ऑफ लॉ, ग्रेटर नोएडा में तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि वायुसेना में तैनाती के दौरान कॉलेज से दूरी और नौकरी की परिस्थितियों के बीच नियमित कक्षाओं में 76 प्रतिशत उपस्थिति कैसे दर्ज हुई। गुड्डू ने पंजीकरण और शपथ पत्र की तारीखों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके अनुसार उपलब्ध दस्तावेजों में ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिनकी जांच आवश्यक थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित शपथ पत्र में नौकरी या व्यवसाय में नहीं होने की घोषणा की गई थी, जबकि उनके दावे के मुताबिक भाटी 30 अप्रैल 2009 तक वायुसेना में कार्यरत थे।

अनुशासन समिति की कार्रवाई को बताया अहम

वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने बताया कि उनकी शिकायत पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने मामले में नौ वाद बिंदु तय किए और दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय दिया। उनके अनुसार, समिति ने नियमित कक्षाओं में उपस्थिति और कॉलेज के रिकॉर्ड सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया। गुड्डू ने दावा किया कि आदेश में उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर गंभीर निष्कर्ष दर्ज किए गए।

उन्होंने कहा कि अनुशासन समिति ने एलएलबी की डिग्री को अमान्य एवं अवैध मानते हुए इसे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत कदाचार माना और मनोज कुमार भाटी का वकालत लाइसेंस निरस्त करने का आदेश दिया। गुड्डू ने इस कार्रवाई को अपनी शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण परिणाम बताया। इस मामले में समिति के आदेश की सटीक शर्तों और निष्कर्षों के लिए आधिकारिक आदेश ही निर्णायक आधार होगा।

“मैं वकील नहीं, पेशे से इंजीनियर हूं”

प्रेसवार्ता में वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की है, लेकिन वे पेशे से इंजीनियर हैं और उन्होंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण नहीं कराया। उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी बात यह है कि मैं वकील नहीं हूं। मैंने एलएलबी की पढ़ाई की है, लेकिन मैं पेशे से इंजीनियर हूं। मैंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण इसलिए नहीं कराया, क्योंकि मैं एक आम नागरिक के तौर पर इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ना चाहता था।”

गुड्डू ने कहा कि एक जागरूक नागरिक के रूप में उन्हें लगता है कि जहां भी नियमों और प्रक्रियाओं में अनियमितता की आशंका हो, वहां तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। उनका कहना था कि शिकायत करने वाले व्यक्ति को आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए, ताकि संबंधित संस्थाएं निष्पक्ष तरीके से जांच कर सकें और कानून के अनुसार निर्णय लिया जा सके।

उन्होंने न्यायालयों, बार काउंसिल और पुलिस अधिकारियों के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, शिकायतों को उचित मंच तक पहुंचाने और मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ता है।

100 से अधिक अधिवक्ताओं पर एफआईआर का दावा

वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने प्रेसवार्ता के दौरान प्रदेश में फर्जी डिग्री और पेशेवर अनियमितताओं से जुड़े अन्य मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 100 से अधिक अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और गौतमबुद्ध नगर में भी कुछ लोगों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में प्रत्येक शिकायत और आरोप की जांच संबंधित एजेंसियों तथा सक्षम प्राधिकरणों के स्तर पर होना आवश्यक है।

गुड्डू ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास शैक्षणिक योग्यता, डिग्री या पेशेवर पंजीकरण में कथित अनियमितता से संबंधित ठोस दस्तावेज हैं, तो उसे सामने आने से हिचकना नहीं चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए और किसी के विरुद्ध कार्रवाई केवल कानून तथा प्रमाणों के आधार पर ही होनी चाहिए।

85 से 100 लोगों के फोन और संदेश मिलने का दावा

वीरेंद्र सिंह गुड्डू के मुताबिक, इस मामले और उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों के बाद उन्हें लगभग 85 से 100 फोन कॉल और संदेश प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर मार्गदर्शन मांगा है।

उन्होंने कहा कि इन लोगों से बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि कई लोग अपनी शिकायतों को उचित मंच तक पहुंचाने और कानूनी प्रक्रिया समझने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे लोगों को सही प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराना और उनकी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में सहयोग करना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

पीड़ितों को एक मंच पर लाने की तैयारी

वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने संकेत दिया कि फर्जी डिग्री और पेशेवर पंजीकरण में कथित अनियमितताओं से प्रभावित लोगों को एक मंच पर लाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इसके तहत पीड़ितों की शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से संबंधित अधिकारियों के सामने रखने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि अन्य लोग भी ठोस साक्ष्यों के साथ सामने आते हैं, तो इस मुहिम को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। उनका प्रयास रहेगा कि पीड़ितों को उचित कानूनी प्रक्रिया की जानकारी मिले और उनकी शिकायतों पर नियमानुसार विचार हो सके।

प्रेसवार्ता के समापन पर गुड्डू ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए नागरिकों की जागरूकता महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि शिकायत दर्ज कराना किसी के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान चलाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित जांच की मांग करना होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि वे दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कथित अनियमितताओं को सामने लाने और पीड़ितों को न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया समझने में सहयोग देने के लिए आगे भी प्रयास जारी रखेंगे।