गौतमबुद्धनगर में पराली प्रबंधन की हकीकत परखने उतरी केंद्र सरकार की टीम, 20 से अधिक गांवों में कृषि यंत्रों और व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण!!
कस्टम हायरिंग सेंटरों के जरिए किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि मशीनरी, एफएआरएमएस ऐप से घर बैठे किराये पर बुक कर सकेंगे कृषि यंत्र
दो टूक//गौतमबुद्धनगर, 30 अक्टूबर 2026। धान की कटाई के सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जमीनी हकीकत परखने के लिए शुक्रवार को भारत सरकार की केंद्रीय टीम ने गौतमबुद्धनगर का दौरा किया। इस दौरान टीम ने जनपद के जेवर, दादरी और बिसरख विकासखंडों के अंतर्गत 20 से अधिक गांवों में पहुंचकर फसल अवशेष प्रबंधन की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसानों के खेतों तथा वहां उपलब्ध आधुनिक कृषि यंत्रों की स्थिति का जायजा लेते हुए उनके उपयोग की जानकारी भी प्राप्त की।
केंद्रीय टीम ने ग्राम घरबरा, पारसोल, दादरी, नूरपुर और फूलपुर सहित विभिन्न गांवों का भ्रमण किया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किस स्तर पर किया जा रहा है।
निरीक्षण टीम में भारत सरकार के भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (सीएफएमटीटीआई) के निदेशक डॉ. नांदेडे, गौतमबुद्धनगर के उप कृषि निदेशक विवेक दुबे तथा वरिष्ठ सहायक साजिद गहलौत शामिल रहे।
जनपद में चार कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक कृषि यंत्र उपलब्ध
निरीक्षण के दौरान उप कृषि निदेशक विवेक दुबे ने केंद्रीय टीम को जनपद में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए संचालित व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न कृषि योजनाओं के अंतर्गत जनपद में चार कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्र संचालित हैं। इनके माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पराली जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सके।
किसानों को रोटावेटर, मल्चर, एमबी प्लाऊ, जीरो सीड ड्रिल, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, श्रेडर, श्रममास्टर, रीपर कंबाइनर, क्रॉप रीपर, लेजर लैंड लेवलर और डिस्क हैरो सहित कई आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन मशीनों की मदद से फसल अवशेषों का इन-सीटू और एक्स-सीटू पद्धति से प्रबंधन किया जा रहा है।
इन-सीटू तकनीक के तहत पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है। वहीं एक्स-सीटू पद्धति के तहत खेत से बाहर पराली का उपयोग पशुचारे, बायोगैस और अन्य उपयोगी उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
पराली से पशुचारा और बायोगैस तैयार करने पर जोर
केंद्रीय टीम ने किसानों से संवाद कर पराली प्रबंधन के विभिन्न विकल्पों की जानकारी ली। किसानों को बताया गया कि धान की पराली को जलाने के बजाय उसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा बेलर मशीन के माध्यम से पराली की गांठें बनाकर नजदीकी कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों और ब्रिकेट निर्माण इकाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
इससे जहां पराली का उपयोगी निस्तारण संभव होता है, वहीं किसानों को फसल अवशेषों से अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष भी जनपद में पराली जलाने की कोई घटना संज्ञान में नहीं आई थी।
एफएआरएमएस ऐप से किराये पर मिलेंगे आधुनिक कृषि यंत्र
निरीक्षण के दौरान सीएफएमटीटीआई के निदेशक डॉ. नांदेडे ने किसानों और कस्टम हायरिंग सेंटर संचालकों को कृषि मशीनरी के बेहतर उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कृषि यंत्रों के संचालन का नियमित रिकॉर्ड रखने के लिए लॉगबुक और मूवमेंट रजिस्टर संचालित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित एफएआरएमएस (फार्म मशीनरी सॉल्यूशंस) ऐप की उपयोगिता के बारे में भी बताया। इस ऐप के माध्यम से किसान अपने आसपास उपलब्ध कृषि यंत्रों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार उन्हें किराये पर बुक कर सकते हैं।
इस डिजिटल सुविधा का सबसे अधिक लाभ लघु एवं सीमांत किसानों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें महंगी कृषि मशीनरी खरीदने के बजाय उचित किराये पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध हो सकेंगे।
उचित किराये पर मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश
सीएफएमटीटीआई के निदेशक ने कस्टम हायरिंग सेंटर संचालकों को निर्देश दिए कि वे किसानों को उचित और वाजिब किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि तकनीक का लाभ उठा सकें। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को किसी भी स्थिति में न जलाएं और उपलब्ध कृषि मशीनरी का अधिकतम उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से पराली का प्रबंधन करें।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन केवल पराली जलाने की घटनाओं को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने, वायु प्रदूषण कम करने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण मदद मिलती है।
उप कृषि निदेशक विवेक दुबे ने बताया कि जनपद में उपलब्ध चार कस्टम हायरिंग सेंटर और 20 से अधिक एकल कृषि यंत्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। कृषि विभाग का प्रयास है कि किसानों को मशीनरी और डिजिटल सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ मिले, जिससे फसल अवशेषों का पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
केंद्रीय टीम के इस निरीक्षण के माध्यम से जनपद में पराली प्रबंधन की व्यवस्थाओं, कृषि यंत्रों की उपलब्धता और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की स्थिति का आकलन किया गया। अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने से बचें और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपनी मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।।
