गौतमबुद्धनगर: नोएडा के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, एआई सिटी से लेकर सौर ऊर्जा तक 11 बड़े प्रस्तावों पर मुहर!!
प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में अहम फैसले, सेक्टर-147 में आईटी हब और सेक्टर-105 में ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स को मंजूरी; किसानों के 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों के मामलों के निस्तारण का रास्ता भी होगा आसान
दो टूक//नोएडा, 28 अक्टूबर 2026। नोएडा के नियोजित विकास, औद्योगिक निवेश, आधुनिक बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को विस्तार देने की दिशा में नोएडा प्राधिकरण ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बुधवार को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश एवं नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में 11 प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में नोएडा में एआई सिटी-कम-बिजनेस पार्क विकसित करने, सेक्टर-147 में आईटी/आईटीईएस परियोजना के लिए भूमि आवंटन योजना लाने, सेक्टर-105 में एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स विकसित करने और किसानों के 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए महायोजना में संशोधन का प्रस्ताव प्रमुख रहा।
बैठक में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एन.जी., यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह सहित बोर्ड के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
बैठक में लिए गए निर्णयों का उद्देश्य शहर में निवेश के नए अवसर पैदा करना, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी करना और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना है।
नोएडा में विकसित होगी एआई सिटी, निवेश और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर
नोएडा को आधुनिक तकनीक और ज्ञान आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बोर्ड बैठक में एआई सिटी-कम-बिजनेस पार्क परियोजना को महत्वपूर्ण मंजूरी दी गई। इसके लिए उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025 को अपनाने तथा मास्टर डेवलपर के चयन के लिए आरएफपी जारी करने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई।
परियोजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), आईटी एवं आईटीईएस, अनुसंधान, स्टार्टअप और कौशल विकास से संबंधित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मास्टर डेवलपर का चयन प्रतिस्पर्धात्मक ई-बिडिंग के माध्यम से होगा। परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जबकि भूमि का स्वामित्व नोएडा प्राधिकरण के पास रहेगा।
निर्धारित शर्तों के अधीन 45 वर्ष की पट्टा अवधि को अतिरिक्त 45 वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान होगा। इसके साथ ही निर्मित क्षेत्र का न्यूनतम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी एवं ज्ञान आधारित सेवाओं के लिए आरक्षित रखने की व्यवस्था भी की गई है। इस परियोजना से तकनीकी निवेश को प्रोत्साहन मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सेक्टर-147 में 68 हजार वर्ग मीटर भूमि पर आईटी/आईटीईएस परियोजना
नोएडा के सेक्टर-147 में 68,000 वर्ग मीटर भूमि पर संस्थागत आईटी/आईटीईएस भू-उपयोग के लिए आवंटन योजना प्रकाशित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करना है।
इस कदम से आईटी कंपनियों को आधुनिक कार्यस्थल उपलब्ध कराने और नोएडा में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित गतिविधियों का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सेक्टर-105 में बनेगा एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स
बोर्ड बैठक में सेक्टर-105 में 12,596.64 वर्ग मीटर वाणिज्यिक भूमि पर एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई। पूरी भूमि को एक भूखंड के रूप में एकल बोली के माध्यम से एक पट्टाधारक को आवंटित किया जाएगा।
योजना के तहत 4.0 एफएआर, अधिकतम 20 मीटर ऊंचाई और भूखंड के भीतर नियमानुसार पार्किंग की व्यवस्था का प्रावधान होगा। पट्टा प्रलेख निष्पादित होने के पांच वर्ष के भीतर अधिकतम तीन चरणों में निर्माण पूरा कर अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।
किसानों के 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों का रास्ता होगा आसान
किसानों के 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए नोएडा महायोजना-2031 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्राधिकरण द्वारा अर्जित भूमि के सापेक्ष किसानों को विकसित आवासीय भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था के तहत कई भूखंडों का नियोजन किया जा चुका है, जबकि कुछ मामले अभी शेष हैं।
महायोजना के अनुसार शहर का विकास लगभग पूरा हो जाने के कारण शेष भूखंडों के नियोजन में कठिनाइयां आ रही हैं। ऐसे में बोर्ड ने मौजूदा गांव की आबादी से लगी भूमि पर 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों के नियोजन के लिए महायोजना के जोनिंग रेगुलेशन 7.3.1 में नया प्रावधान शामिल करने का निर्णय लिया।
इस व्यवस्था के तहत आम जनता से आपत्तियां और सुझाव प्राप्त करने के बाद संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इससे किसानों के लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मॉडल भवन विनियम-2026 लागू करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी मॉडल भवन विनियम-2026 को नोएडा प्राधिकरण में अपनाने की मंजूरी दी गई। नए विनियमों को प्रभावी रूप से लागू करने तथा प्राधिकरण स्तर पर निर्णय लेने से जुड़े बिंदुओं पर विचार करने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया।
इससे भवन निर्माण और विकास से संबंधित नियमों को लागू करने में समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान को मंजूरी, यातायात और माल परिवहन में सुधार की उम्मीद
नोएडा क्षेत्र के लिए तैयार सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए इसे उत्तर प्रदेश शासन की स्वीकृति के लिए भेजने का निर्णय लिया गया।
इस योजना में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों, माल परिवहन, यातायात प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स संबंधी बुनियादी ढांचे का अध्ययन कर शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार की गई है।
योजना का उद्देश्य माल की आवाजाही और वितरण को अधिक प्रभावी बनाना, परिवहन लागत कम करना, यातायात जाम और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को घटाना तथा संबंधित विभागों, औद्योगिक इकाइयों और परिवहन संचालकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
सेक्टर-32 में भू-भाटक की दर 612 रुपये से घटकर करीब 232 रुपये
सेक्टर-32 स्थित वाणिज्यिक भूखंड संख्या सीसी-01 पर निर्मित यूनिटों के उपपट्टाधारकों से लिए जाने वाले भू-भाटक की दर में एकरूपता लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पुनर्गणना के बाद वार्षिक भू-भाटक की दर 612 रुपये प्रति वर्ग मीटर से घटाकर लगभग 232 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।
इसके अतिरिक्त, वाणिज्यिक भूखंडों और उन पर निर्मित संपत्तियों के उपपट्टा प्रलेखों के निष्पादन एवं हस्तांतरण की सुविधा हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), सोसायटी और ट्रस्ट के पक्ष में उपलब्ध कराने को भी मंजूरी दी गई। एक से अधिक नामों में संपत्ति उपलब्ध कराने की सुविधा से पात्र आवेदकों के लिए प्रक्रियाएं आसान होंगी।
औद्योगिक इकाइयों को राहत, स्थानांतरण शुल्क में कमी
यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में औद्योगिक इकाइयों से संबंधित कुछ प्रावधानों में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत कार्यशील औद्योगिक इकाइयों के स्थानांतरण शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया।
इकाइयों को प्रारंभिक तीन या पांच वर्ष की अवधि के बाद अधिकतम तीन वर्ष का अतिरिक्त समय देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए पहले, दूसरे और तीसरे अतिरिक्त वर्ष का समय-विस्तार शुल्क क्रमशः 3, 5 और 7 प्रतिशत निर्धारित किया गया।
अंशधारिता में बदलाव की सूचना देने में देरी पर लगने वाले शुल्क को 500 रुपये से घटाकर 300 रुपये प्रतिदिन करने की भी मंजूरी दी गई। निर्धारित शर्तों के तहत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को एलएलपी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया सरल बनाने और पारिवारिक अंशधारिता में बदलाव के मामलों में शुल्क छूट के लिए शासन द्वारा निर्धारित परिवार की परिभाषा अपनाने का निर्णय भी लिया गया।
मोबाइल टावर और राइट ऑफ वे की अनुमति प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
दूरसंचार संबंधी नीति को अपनाने तथा मोबाइल टावर और राइट ऑफ वे से संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया ऑनलाइन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह निर्णय भारत सरकार की 17 सितंबर 2024 की अधिसूचना के अनुरूप लिया गया।
नई व्यवस्था में पहले लागू एक लाख रुपये अथवा पहले से स्थापित टावर के लिए डेढ़ लाख रुपये के आवेदन शुल्क और तीन लाख रुपये की बैंक गारंटी की शर्तें नहीं रहेंगी। हालांकि, भूमि के ऊपर दूरसंचार नेटवर्क स्थापित करने के लिए आवेदन की जांच का शुल्क 10,000 रुपये यथावत रहेगा।
इस बदलाव से दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार और संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिल सकती है।
प्राधिकरण की संपत्तियों पर लगेंगे 15 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र
पर्यावरण संरक्षण और बिजली खर्च में बचत के उद्देश्य से नोएडा प्राधिकरण के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बहुस्तरीय कार पार्किंग और गंगाजल भूमिगत जलाशयों पर आरईएससीओ मॉडल के तहत लगभग 15 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को मंजूरी दी गई।
इसमें सीवेज शोधन संयंत्रों और जलाशयों पर करीब 8 मेगावाट तथा बहुस्तरीय कार पार्किंग स्थलों पर लगभग 7 मेगावाट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। परियोजना को संबंधित एजेंसी के साथ बिजली खरीद समझौते के आधार पर लागू किया जाएगा।
प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, इस परियोजना से बिजली खर्च में बचत होगी और आगामी 25 वर्षों में लगभग पांच लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।
विकास, निवेश और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित रहे फैसले
नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय शहर के औद्योगिक विकास, आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के विस्तार, कारोबारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण, परिवहन व्यवस्था में सुधार, किसानों के आबादी भूखंडों से जुड़े मामलों और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से संबंधित हैं।
एआई सिटी-कम-बिजनेस पार्क, आईटी/आईटीईएस परियोजना और एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स जैसे प्रस्तावों से जहां निवेश के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है, वहीं औद्योगिक नियमों में संशोधन और संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव से कारोबार को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इन फैसलों का वास्तविक लाभ उनके प्रभावी क्रियान्वयन और शासन स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियां मिलने पर निर्भर करेगा।
